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सावन विशेष : गुफा में स्थित इस शिव मंदिर की रक्षा करते हैं नागदेव, प्रकृति ने दूध से किया अभिषेक

शिव मंदिरों में सावन माह में श्रद्धा भक्ति से शिव आराधना हो रही हैं।

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धार

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Ramesh Vaidh

Aug 13, 2018

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इसलिए नाम है कोटेश्वर

विक्की राज पुरोहित. कोद. सावन का महीना और भोले की भक्ति मानो दूध में शकर मिला दी गई हो। सावन माह में शिव आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। मालवा माटी को मिली इस तपोभूमि पर इस विंध्याचल पर्वत श्रेणियों के पहाडिय़ों में आने वाले पौराणिक कथाओं का बखान कर रहे। शिव मंदिरों में सावन माह में श्रद्धा भक्ति से शिव आराधना हो रही हैं। ऐसा ही एक शिव मंदिर अपनी चमत्कार एवं मनवांछित फल प्राप्त होने वाला कोटेश्वर महादेव पर इन दिनों सावन माह में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। जहां साक्षात भोलेनाथ का वास हो ऐसी जगह को मालवा की धार्मिक नगरी कोटेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है।

मान मनोहर की बेले कर रही तीर्थ का गुणगान तीर्थ पर चारों और फैली मान मनोहर की बेले तीर्थ का गुणगान करती नजर आ रही है। महाभारतकालीन इस शिवालय में एक नहीं अनेक की किवंदतियां हैं। साथ पर्यटक स्थल के नाम से भी प्रचलित है। अपने आप में कोटेश्वर महादेव का यह अति प्राचीन मंदिर एक अलग ही छटा बिखेरता है। पहाड़ों की तलहटी में हरी भरी बैलों के बीच गुफा में स्थित एक जलाधारी में भी द्विलिंगेश्वर शिवलिंग का होना भी मायने रखता है। यहां भगवान भोलेनाथ की जलाधारी का मुख पश्चिमी भी मुख है।

गुफा के गर्भ ग्रह में भगवान भोलेनाथ के आसपास सर्प पर विराजमान रहते हैं, लेकिन यह कभी किसी को भी किसी प्रकार से नुकसान नही पहुंचाते हैं। चाहे सावन का महीना हो पूर्णिमा का मेला हो या अमावस्या हो। किसी भी प्रकार का पर्व आदिकाल से यहां ऋषि मुनि तपस्या करते आ रहे हैं। घने जंगलों के बीच कोट प्रजाति के नाग अत्यधिक पाए जाते थे, जिससे इस स्थान का नाम कोटेश्वर पड़ा। जिस स्थान पर अभी वर्तमान में गंगा की धारा बहती है उसी प्राकृतिक झरने पर आदि काल में यहां दूध की गंगा बहा करती थी। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु इसी जल से कोटेश्वर महादेव का अभिषेक करते हो पीने के उपयोग में लिया जाता है। धर्म गली का बड़ा महत्व इस मंदिर के चमत्कार की लंबी कहानियां यहां धर्म गली एक पत्थर दो खंभों पर टिका है। उसी पत्थर में एक गोलाकार का बड़ा छेद श्रद्धालु इस पार से उस पार निकलते है।

घने जंगल के बीच में हिंगलाज माता का मंदिर कोटेश्वर महादेव के बीज घने जंगल में हिंगलाज माता का मंदिर भी है। जहां झरना बहता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा को मालवा क्षेत्र में सबसे बड़ा पांच दिवसीय मेले का आयोजन जनपद पंचायत बदनावर के द्वारा किया जाता है। मेले में मनोरंजन के साधनों के साथ करोड़ों रुपए का व्यापार होता है। लाखों की संख्या में आमजन आते हैं कोटेश्वर धाम मेले का शुभारंभ होता है।