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मंत्र ही शारीरिक एवं मानसिक मजबूती प्रदान करते है

आचार्य मृदुरत्न सागर सूरी महाराज ने महा मांगलिक श्रवण करवाया

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मंत्र ही शारीरिक एवं मानसिक मजबूती प्रदान करते है

महामारी के चलते नियमानुसार चुनिंदा श्रावकों के बीच ही महा मांगलिक का श्रवण करवाया गया जिसका सोशल मीडिया पर अन्य सभी श्रावकों ने अपने घरों पर इसका श्रवण किया।

बदनावर . हमारे प्राचीन ग्रंथ दुर्लभ मंत्रों से भरे हुए हैं, इन ग्रंथों में शारीरिक एवं मानसिक उत्पन्न हुई व्याधियों को समाप्त करने की शक्ति है। पूर्व के आचार्य द्वारा जब जब भी मानव जाति पर दुख आया तब तब इन मंत्रों की रचना की गई एवं तत्कालीन उत्पन्न हुई बीमारियों पर विजय पाई है। इन मंत्रों में ना सिर्फ बीमारी वरन सुख शांति एवं समृद्धि की भी कामना की गई है।
यह मंत्र ही हमें शारीरिक एवं मानसिक मजबूती प्रदान करते हैं, आवश्यकता है इन्हें पूर्ण श्रद्धा के साथ ग्रहण करने की। इन मंत्रों के श्रवण करने से 108 प्रकार के भय समाप्त हो जाते हैं आप सभी इस महा मांगलिक का श्रवण कर अपने मन मस्तिष्क को मजबूत बनाकर अपने दुखों पर विजय प्राप्त करें।यह उद्गगार आचार्य मृदुरत्न सागर सूरी महाराज ने चातुर्मास की प्रथम महा मांगलिक को श्रवण करवाते हुए कहे। नवकार मंत्र से शुरुआत करते हुए आपने वज्र पंजर स्त्रोत द्वारा विभिन्न मुद्राओं के साथ शरीर को सुरक्षित करवाया। इसके पश्चात स्वर्णाक्षर से लिखित शास्त्र द्वारा लगभग 2500 वर्ष प्राचीन आचार्य भद्रबाहु द्वारा रचित उवसगरम सूत्र, मुनि सुंदर सूरी जी कृत शांति करम सूत्र, 13 सौ वर्ष प्राचीन आचार्य मानदेव सूरी कृत तिजयपहुत स्त्रोत, राजा भोज कालीन आचार्य मानतुंग द्वारा रचित नमिउण स्त्रोत, आचार्य भद्रबाहु रचित ग्रहशांति स्त्रोत, आचार्य कमलपृभ सुरि रचित जिन पंजर स्तोत्र, शिवा देवी कृत बड़ी शांति, के साथ शांति धारा पाठ एवं गौतम अष्टक स्त्रोत का श्रद्धालुओं को श्रवण करवाया गया। युवा मुनि अरहम सागर महाराज ने इन स्त्रोत की हिंदी में विवेचना की। तपस्वी मुनिराज मोक्षरत्न सागर महाराज, साध्वी वीरति यशाश्री, हेम ज्योति श्री , एवं रम्य ज्योति श्री भी विराजित थे। श्री संघ के मीडिया प्रभारी पुष्पेंद्र पगारिया ने बताया कि महामारी के चलते नियमानुसार चुनिंदा श्रावकों के बीच ही महा मांगलिक का श्रवण करवाया गया जिसका सोशल मीडिया पर अन्य सभी श्रावकों ने अपने घरों पर इसका श्रवण किया। संचालन महेंद्र सुंदेचा ने किया। नितिशा मेहता नागदा द्वारा 26 उपवास किए गए जिनका 26 जुलाई को मासक्षमण तप का पारणा होगा।
महामंागलिक श्रवण कराते आचार्य।