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रफ्तार के लिए बना नेशनल हाईवे, ब्रेक लगा रहे ढाबे

इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर कानून तोडऩे वालों पर कार्रवाई की बजाय चुप्पी साधे बैठे अफसर, अब तक एक को भी जारी नहीं हुआ नोटिस

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धार

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atul porwal

Sep 25, 2019

रफ्तार के लिए बना नेशनल हाईवे, ब्रेक लगा रहे ढाबे

रफ्तार के लिए बना नेशनल हाईवे, ब्रेक लगा रहे ढाबे

पत्रिका पड़ताल
धार.
नियम कहता है कि नेशनल हाईवे के 40 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है। मसलन होटल, ढाबे भी नहीं चलाए जा सकते। बावजूद इसके नियम तोड़े जा रहे हैं। नेशनल हाईवे बनते ही रफ्तार भरी यात्रा के लिए, लेकिन इस पर हाईवे के आसपास बने डाबे होटल और अवैध पार्किंग ब्रेक लगा रही है। इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर इंदौर से लेकर धार जिले के सीमा क्षेत्र में ही दर्जनों ढाबे हाईवे से महज 5 से 10 मीटर की दूरी पर खोल दिए गए, जिससे हादसे हो रहे हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी से अब तक ना तो इन पर कार्रवाई की गई और ना ही इन्हें नोटिस भर दिया गया।

गुणावद से शुरू होता है ढाबों का मकडज़ाल
इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे का धार जिले में घाटा बिल्लौद से सफर शुरू होता है। घाटा बिल्लौद बायपास से गुजरे इस हाईवे के किनारे पहले से ही कुछ गोदाम और भवन बने हुए हैं, जिन पर कार्रवाई मुमकीन नजर नहीं आ रही, लेकिन गुणावद से ही हाईवे किनारे ढाबों का मकडज़ाल शुरू हो रहा है। गुणावद गांव से गुजरे हाईवे किनारे ही पांच ढाबे सडक़ तक पार्किंग और हादसों का सफर पैदा कर रहे हैं। इसके बाद नेशनल हाईवे के किनारों पर डाबों और होटलों के अलावा अवैध पार्किंग का सिलसिला राजगढ़ तक जारी है। हालांकि राजगढ़ में भी हाईवे बायपास से गुजरा, लेकिन वहां भी लोगों ने किनारों पर ढाबे शुरू कर दिए।

नौगांव बायपास पर हो चुके हैं हादसे
कानून तोड़ नेशनल हाईवे को मुंह चिढ़ाने वाले लोग हादसों की स्थिति पैदा कर रहे हैं। गौरतलब है कि धार शहर के नौगांव बायपास पर नेशनल हाईवे की परिधि में ही कई ढाबे संचालित हो रहे हैं, जिन पर पेटपूजा के चक्कर में सडक़ पर अवैध पार्किंग हो रही है। बायपास पर बड़ा चौराहा है, जहां इंदौर-अहमदाबाद नेशलनल हाईवे को नागदा-गुजरी स्टेट हाईवे काट रहा है। इसी चौराहे पर बेकाबू हुए ढाबों ने सडक़ तक अतिक्रमण पसार दिया है। इसी कारण अब तक यहां आधा दर्जन से ज्यादा दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
इधर नेशनल हाईवे अथॉरिटी के इंदौर-अहमदाबद नेशनल हाईवे प्रभारी अधिकारी मनीष असाती ने केवल एनएचएआई के नियमों पर चर्चा की, लेकिन वर्जन से इंकार कर दिया।