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नमक से रोटी खाने को मजबूर हैं ये लोग, जो पैसा मिलता है उससे नहीं आता किराने का भी सामान

मध्यप्रदेश में यूं तो सरकार द्वारा विभिन्न योजना के तहत बुजुर्ग, निराश्रित, दिव्यांग व अन्य लोगों को पेंशन दी जाती है, ताकि वे अपना गुजर बसर कर सकें, लेकिन आश्चर्य की बात है कि इस मंहगाई के दौर में महज 600 रुपए मिलने वाली पेंशन से किराने का सामान भी पूरा नहीं आ पाता है.

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नमक से रोटी खाने को मजबूर हैं ये लोग, जो पैसा मिलता है उससे नहीं आता किराने का भी सामान

नमक से रोटी खाने को मजबूर हैं ये लोग, जो पैसा मिलता है उससे नहीं आता किराने का भी सामान

धार. मध्यप्रदेश में यूं तो सरकार द्वारा विभिन्न योजना के तहत बुजुर्ग, निराश्रित, दिव्यांग व अन्य लोगों को पेंशन दी जाती है, ताकि वे अपना गुजर बसर कर सकें, लेकिन आश्चर्य की बात है कि इस मंहगाई के दौर में महज 600 रुपए मिलने वाली पेंशन से किराने का सामान भी पूरा नहीं आ पाता है, ऐेसे में कई लोग नमक से रोटी लगाकर खाने को मजबूर हो गए हैं, ऐसा ही एक मामला धार जिले में सामने आया, इस परिवार के मुखिया का निधन होने के बाद अगर बेटे को कहीं काम मिल जाता है, तो उस दिन तो सब्जी से रोटी खा लेते हैं, लेकिन काम नहीं मिलता है तो रोटी खाने का एक मात्र सहारा नमक ही रहता है।

एक साल पेला पति मरिगयो, छोरो है काम मिले तो उना दिन बगरों खई ला, नी तो लूण (नमक) से रोटी खानी पड़ी। पेंशन आज तक म्हारे नी मिली है।

ये कहना है मांडू में रहने वाली शांतिबाई का। वे रानी रूपमति महल के पहले एक झोपड़े में रहती हैं। उनके पति गंगाराम का निधन एक साल पहले हो गया। शांतिबाई एक साल से पेंशन के लिए भटक रही है, लेकिन उन्हेंं पेंशन नहीं मिल पा रही है। ऐसी स्थिति में परिवार को सूखी रोटी खाकर गुजारा करना पड़ रहा है।


शांति बाई के बेटे मोरसिंह ने बताया कि किसी दिन मजदूरी मिल जाती है तो तेल, शक्कर ले आते हैं। ये भी सिर्फ ग्राम में ही खरीद पाते हैं। उधर, राशन दुकान से कई बार थंब की दिक्कत आने पर राशन नहीं मिल पाता है। दरअसल, जंगलों में रहने वाले ये लोग मक्का की रोटी ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन मक्का भी महंगी होने से दिक्कतें आ रही है। इसके आसपास भी कई परिवार ऐसे हैं जिन तक सरकारी योजना नहीं पहुंच पाई है। जिले में कुल १ लाख १७ हजार 161 लोग अलग-अलग प्रकार की पेंशन पाते हैं।


12 तरह की पेंशन की है व्यवस्था

सामाजिक न्याय विभाग द्वारा 12 तरह की पेंशन दी जाती है। इसमें कल्याणी, दिव्यांग, विधवा आदि को पेंशन दी जाती है। सभी को एक समान 600 रुपए प्रतिमाह राशि दी जाती है। 600 रुपए में महंगाई के दौर में गुजारा करना अब इन लोगों को मुश्किल पड़ रहा है। राशन मिल जाने के बाद भी इन्हें शकर, तेल, मिर्च, गैस सिलेंडर या चूल्हे की लकड़ी बाजार से खरीदना पड़ती है।

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ये है वर्तमान रेट

नाम दर किलो
सोया तेल-160
तुअर दाल-100
मूंग दाल-100
आटा 5 किलो-165
शक्कर-40
गैस सिलेंडर-1020

अब आप सोचें, महज 600 रुपए की पेंशन में ये सामान कैसे आ पाएगा, इस कारण मजबूरी में लोग नमक से रोटी खा रहे हैं।