23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पांच शताब्दियों से लोग दे रहे राणा प्रताप के शौर्य की मिसाल

शौर्य दिवस पर विशेष

2 min read
Google source verification
पांच शताब्दियों से लोग दे रहे राणा प्रताप के शौर्य की मिसाल

महाराणा प्रताप का जन्म स्थान कुंभलगढ़ किला और उनके शौर्य का प्रतीक चित्तौडग़ढ़ किला दोनों पर डाक टिकट जारी किए हैं जो क्रमश: 5 और 12 रुपए मूल्य वर्ग के हैं।

बदनावर. आज से लगभग 520 वर्ष पहले जन्मे महाराणा प्रताप भारत माता का वह वीर सपूत है, जिसके शौर्य व साहस की मिसाल है आज भी पूरा देश देता है। महाराणा प्रताप के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए परंतु उन्होंने अकबर की अधीनता कभी स्वीकार स्रनहीं की। हल्दीघाटी का युद्ध बहुत लंबा चला। एक समय ऐसा भी आया जब महाराणा प्रताप का खजाना खाली हो गया उनकी सेना बिखरने लगी। सैनिकों को राशन की समस्या आन पड़ी मजबूरन राणा को अपनी मातृभूमि को अंतिम नमन करके चित्तौड़ग़ढ को छोडक़र जाने का मन बनाना पड़ा ऐसे समय में उनके महामंत्री जैन दानवीर भामाशाह उन्हें ढूंढते ढूंढते वहां जंगल में जा पहुंचे, जहां राणा थे। भामाशाह को पता चला कि महाराणा चित्तौडग़ढ़ छोडऩे का मन बना चुके हैं।
जब उन्हें उसका कारण पता चला तो उन्होंने अपनी दानशीलता का परिचय देते हुए राणा से कहा कि मेरे पुरखों का खजाना आपके चरणों में अर्पित है। इसमें इतना धन है कि 25 हजार सैनिकों को हम 12 वर्षों तक भोजन खिला सकते हैं। भामाशाह की बात सुनकर राणा की निराशा आशा में बदल गई। कमजोर पड़ गया उत्साह फिर से जागृत हो गया। जोश हिलोरें लेने लगा और राजस्थानी वीर बांकुरो की हुंकार हल्दीघाटी में फिर से गूंजने लगी।
धन्य है राणा का साहस और भामाशाह की दानवीरता देश के लोग आज भी दोनों के गुणगान करते नहीं थकते। उक्त जानकारी देते हुए डाक टिकट संग्राहक ओम पाटोदी ने बताया कि भारतीय डाक विभाग द्वारा महाराणा प्रताप पर अब तक तीन डाक टिकट जारी किए जा चुके हैं वहीं उनके ऊपर 1 रुपए और 10 रुपए के चलन वाले सिक्के और 100 रुपए का स्मारक सिक्का भी जारी किया गया। इसके साथ भारत के प्रसिद्ध किलों की शृंखला में महाराणा प्रताप का जन्म स्थान कुंभलगढ़ किला और उनके शौर्य का प्रतीक चित्तौडग़ढ़ किला दोनों पर डाक टिकट जारी किए हैं जो क्रमश: 5 और 12 रुपए मूल्य वर्ग के हैं।