
Dhar
धार.
अमूमन हर किसी को बायीं ओर हृदय होता है, लेकिन जिला अस्पताल में आई एक गर्भवती के दाहिनी ओर हृदय है। जांच के बाद यह पता चलने पर कि हृदय दाहिनी ओर है। डॉक्टर बोले यह डेक्स्ट्रोकार्डिया पेशेंट है, इंदौर मेडिकल कॉलेज जाना उचित रहेगा। महिला का पति बोला आप तो यहीं ऑपरेशन कर दो, हर बात की जिम्मेदारी हम ओढ़ लेते हैं। गंभीर मामला होने के बाद भी जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन कर जच्चा, बच्चा को सुरक्षित रखा। शुक्रवार को हुए इस ऑपरेशन के बारे में बताया गया कि हृदय दाहिनी ओर होने से उसके ऑपरेशन के समय कॉर्डियोलॉजिस्ट का होना जरूरी है। जरा सी गलती में जच्चा या बच्चा किसी की जान जाने या महिला में विकृत बीमारी फैलने का अंदेशा रहता है। बावजूद इसके तीन डॉक्टरों ने मिलकर सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया।
यह है मामला
एनेस्थिटिक डॉ. गिरीराज भूर्रा ने बताया कि शुक्रवार को बदनावर निवासी 23 वर्षीय भावना को उसका पति श्याम लाल जिला अस्पताल लाया। पूरा समय होने से भावना कभी भी बच्चे को जन्म दे सकती थी, लेकिन जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उसका हृदय दाहिनी ओर है। इधर पूरा गर्भ का समय होने के बाद भी दर्द नहीं होना और पूर्व में भी एक प्रसूति ऑपरेशन से होने के कारण दूसरी में भी ऑपरेशन होना था। हृदय की स्थिति विपरित देखकर श्याम को कहा गया कि वे मरीज को लेकर इंदौर मेडिकल कॉलेज जाएं, वहां उसका ऑपरेशन करवाना उचित होगा। इसके बावजूद श्याम ने इंकार करते हुए यहीं ऑपरेशन करने को कहा तो डॉक्टरों ने पूरी तैयारी के साथ इसे अंजाम दिया।
खून की कमी और दाहिनी ओर हृदय
एक तो गर्भ का पूरा समय, दूसरा हृदय दाहिनी ओर। इस पर पूर्व ऑपरेशन के कारण दूसरी प्रसूति में भी ऑपरेशन करना जरूरी था। इधर महिला का एचबी केवल 8.5 ग्राम था, जो ऑपरेशन को और गंभीर बना रहा था। एमडी मेडिसिन डॉ. हेमंत नरगावे ने ऑपरेशन की तैयारी की, वहीं मरीज के परिजन से लिखवा लिया गया कि वे हर स्थिति के लिए स्वयं जिम्मेदार रहेंगे। इसके बाद डॉ. नरगावे ने मरीज को फिटनेस दी, वहीं एनेस्थीसिया डॉ. गिरीराज भूर्रा ने दिया। इसके बाद डॉ. अनिता बघेल ने महिला का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन गंभीर था, लेकिन खून की कमी को देखते हुए मरीज को पहले ही खून चढ़ा दिया गया था, जिससे यह सफल रहा। अब भावना व जन्मा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, जो जिला अस्पताल के सीजर वार्ड में और स्वस्थ होने के लिए भर्ती हैं।
इंदौर जाते तो बच्चे को हो सकता था नुकसान
डॉक्टरों का कहना है कि विपरित दिशा में हृदय होने से किसी भी कॉर्डियोलॉजिस्ट का ऑपरेशन के समय मौजूद होना जरूरी है। यही सोचकर इंदौर जाने के लिए कहा था। लेकिन मरीज के पति ने जाने से इंकार कर दिया। डॉ. भूर्रा का कहना है कि पूरा समय होने से इंदौर ले जाने में गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान हो सकता था। हालांकि ऑपरेशन गंभीर था, लेकिन डॉक्टरों के तालमेल और अच्चे ईलाज से सब कुछ ठीक हो गया।
लाखों में एक होता है डेक्स्ट्रोकार्डिया पेशेंट
डॉ. नरगावे ने बताया कि वैसे तो हृदय बायीं ओर होता है, लेकिन दाहिनी ओर हृदय वाले लाखों में एक या दो लोग होते हैं। जिला अस्पताल में आने वाला यह पहला मामला बताया जा रहा है, जिसमें डेक्स्ट्रोकार्डिया पेशेंट के रूप में भावना गर्भावस्था में अस्पताल पहुंची। भावना में हृदय की यह स्थिति जन्नजात है। इससे पहले भी भावना एक बच्चे को जन्म दे चुकी है, वहीं शुक्रवार को उसकी दूसरी डिलेवरी हुई।
गंभीर तो है, लेकिन सब कुछ ठीक रहा
हृयद दूसरी दिशा में होने से ऑपरेशन के समय गड़बड़ी की संभावनाएं ज्यादा होती है। धार में यह पहला मामला है जब कोई गर्भवती का ऑपरेशन करना था और उसका दिल बायीं ओर ना होकर दाहिनी ओर था। इसलिए पहले ही हमने ईसीजी, फिजिशियन फिटनेस व एचबी की जांच करवा ली थी। इधर मरीज के पति का हम पर विश्वास और डॉक्टरों का सहयोगात्मक काम, ऑपरेशन ठीक रहा। अब सब कुछ ठीक है और जच्चा, बच्चा को पांच से सात दिन यहीं भर्ती रखेंगे।
-डॉ. अनिता बघेल, स्त्री रोग विशेषज्ञ
Published on:
03 Aug 2019 11:22 am
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