
VIDEO शिव महापुराण कहती है कर्म प्रधान है भजन करो कीर्तन करो
कोद. आप जिसकी निंदा कर रहे है एक बार उससे जाकर मिलना जरूर कि क्या वो निंदा के लायक है भी की नहीं। किसी को हल्के में व छोटा मत समझो, यह समय का च्रक है कब किसी को पलट कर दे जिदंगी का भरोसा नहीं। इसलिए जब तक उस व्यक्ति से आप नहीं मिल लेते तब तक उसकी निंदा मत करना।
यह बात कोटेश्वर में चल रही कथा में वाचक प्रदीप मिश्रा ने कही। कहा कि मंदार आंकडा का पौधा जहरीला हो गया जिसे पशु पक्षी भी नहीं खाते है। शमी कांटेदार होकर दोनों ही वृक्ष हो गए। जिस जगह पर मंदार और शमी का पौधा 21 वर्ष तक साथ रहेंगे उसकी जड में 33 कोटी देवी देवता विराजित रहेंगे और उस घर में अष्ट सिद्धी नव निधि की कमी नहीं होगी गणेश जी कहते है कि मेरी आराधना करने वाले शमी व मंदार का पुष्प, दुर्वा के साथ जिस कामना से लाकर अर्पित करेंगे तो उनकी मनवांछित कामना पूर्ण करूगा।
सोमवार की अष्टमी, प्रदोष, शिवरात्रि को एक शमी का पत्ता अर्पित करें
मंदार में दो कलर के पुष्प होते है उनमें एक आसमानी व दूसरा सफेद। विषम परिस्थिती में फंस कर जब लगने लगे कि कुछ बुरा होने वाला है तब आसमानी फूल लाकर अशोक सुंदरी की जगह छुआ कर शिवजी को समर्पित करदे तो किसी भी प्रकार से अनिष्ट होने का भय नहीं रहेगा। शमी का फूल गलती से भी शिवजी समर्पित हो जाता है तो वह खडडे में नहीं गिरता है बल्कि उभर जाता है। शमी की एक पत्ती के अंदर से एक पत्ती तोडने पर उसमें भी बहुत सारी पत्तियां होती है। सोमवार की अष्टमी, प्रदोष, शिवरात्रि को एक शमी का पत्ता अर्पित करता है तो जितनी एक पत्ती में पत्तिया होती है, तो 84 लाख योनियोंं में उतनी योनियों में जन्म मृत्यु लोक में नहीं लेना पडते है।
पूंजी से किया पुण्य साथ जाएगा लेकिन पूंजी नहीं।
कोटेश्वर महादेव धाम में मुख्य आयोजक शरदसिंह सिसौदिया ने स्ंांपूर्ण क्षेत्रवासियों के कल्याण के लिए पंचपुष्प शिवमहापुराण कथा का आयोजन किया है। जनसमुदाय आनंद की अनुभूमि प्राप्त कर रहा है।
बेटी पिता को एवं बेटा माता को प्रिय होता है
बेटी पिता को एवं बेटा माता को प्रिय होता है। मां को लडका प्रिय होता है। बेटी को थोडा सा भी दुख होता है तो पिता सबसे ज्यादा दुखी होता है। बेटी का माता के प्रति स्नेह होता है इसलिए बेटी का मायका कहलाता है। पुत्र एक कुल को सुधारता है जबकि बेटियां दो कुल सुधारती है। बेटियों को इतना ध्यान रखना चाहिए कि उनके माता पिता उन्हें उच्च शिक्षा व आजादी दे रहे है तो बेटी को भी अपने संस्कारों को ध्यान रखते हुए माता पिता को कन्यादान से वंचित मत करनां।
चौथे दिन कथा में ये रहे उपस्थित
शिवकुमार सिंह सिसौदिया एवं ओमप्रकाश पांडे की स्मृति में आयोजित पंचपुष्प श्री शिवमहापुराण कथा में आयोजक शरदसिंह सिसौेदिया, परिजन के साथ देपालपुर विधायक विशाल पटेल, खाचरोद विधायक दिलीप गुर्जर, पूर्व सांसद गजेन्द्रसिंह राजूखेडी, नपं अध्यक्ष मीना शेखर यादव, उपाध्यक्ष राजेन्द्रसिंह, जिला कांग्रेस अध्यक्ष कमल किशोर पाटीदार, प्रभा गौतम, कुलदीप बुंदेला, मनोज गौतम, कमलसिंह पटेल, जनपद उपाध्यक्ष ममता पाटीदार, पाटीदार समाज के प्रातिय अध्यक्ष कृष्णा पाटीदार आदि ने कथा में शामिल होकर आरती लाभ लिया।
दो दिन में पांडाल 50 हजार वर्ग फीट बढाया
चौथे दिन श्रद्धालुओं की संख्या बडकर डेढ लाख पार
हो गई। चौथे दिन भी पांडाल बढाया गया।सोमवार को तापमान भी अधिक रहाए श्रद्धालु अपने अपने साधनों से हवा करते नजर आए। बढाए गए पांडाल के बाद भी लोग यहां वहां बैठकर कथा सुनते रहे। सोमवार को पंडित मिश्रा एवं कथा आयोजक शरदसिंह सिसौदिया का पाटीदार समाज, राजपूत समाजएत्रिवेणी धाम शिव मदिर समिति कडौदकलां सहित अनेक संगठन ने साफा बांधकर स्वागत किया। विनय ठाकुर की बाउंसर ंटीम द्वारा आायोजन में सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है जिसमें 60 सदस्यों के साथ महिला बाउंसरो द्वारा भी तैनात रहकर सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। जानकारी आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी गोवर्धनसिंह डोडिया खिलेडी ने दी।
कोटेश्वर में कथा आयोजन से जंगल में मंगल हो गया
कोद. सोमवार सुबह कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा मीडिया कर्मियों से रूबरू हुए। राजनीति छोड़ विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्नों के जवाब दिए और उन्हें इस कथा के कवरेज व आयोजन के लिए शरदसिंह सिसौदिया व मीडिया को धन्यवाद भी दिया।कहा कि सिसौदिया ने प्राचीन दर्शनीय स्थल कोटेश्वर धाम में कथा का आयोजन करवा कर जंगल में मंगल कर दिया है। कोटेश्वर कोई मामूली धर्म स्थल नहीं है। यहां भगवान शंकर पर जलधारा गिरती है। जबकि आसपास के क्षेत्र में सूखा है।
कोटेश्वर में आने वाले श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए धर्मशाला निर्माण के लिए 2 लाख 51 हजार रुपए दिए। तीर्थ विकास के लिए सिसौदिया और मिलकर योजना बनाएं। पुरातत्व विभाग को भी इसके महत्व को समझ कर संरक्षण के प्रयास करना चाहिए।
देश पहले से ही हिंदू राष्ट्र है
हिंदू राष्ट्र के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि यह देश पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। एक दूसरे के प्रति समर्पण और आनंद का भाव रखना तथा सबके साथ समानता का व्यवहार करना ही सच्चा सनातन धर्म है। धर्मांतरण भी ऐसा ही विषय है। जैसे दूसरे की पत्तल में भोजन करने की बजाय अपना भोजन स्वयं बनाना चाहिए। कथा आयोजक शरदसिंह सिसौदिया व सहयोगी राजेंद्र खोकर समेत मीडिया प्रभारी गोवर्धनसिंह डोडिय़ा तथा बड़ी संख्या में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार मौजूद थे।
Published on:
27 Mar 2023 08:09 pm
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