
Today, the hand operated work, tomorrow will ask for lease, someone is
धार.
सरकारी जमीन या डूब की ये तो अफसरों को भी पता नहीं, लेकिन शहर की प्यास बुझाने वाले दिलावरा तालाब की जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा होने लगा है। कहीं खेती के लिए जमीन जोत दी गई तो कहीं से बगैर अनुमति खुदाई कर मिट्टी चुराई जा रही है। नगर पालिका का कहना है कि तालाब से हमारे लिए केवल पानी आरक्षित है, जबकि तालाब के रखरखाव की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग(डब्ल्यूआरडी) की है। इधर सिंचाई विभाग का कहना है कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों को सूचना देना चाहिए, जिससे कब्जे और अवैध खुदाई को रोका जा सके। बता दें कि पिछले तीन वर्षों से बारिश का माप कम होता जा रहा हे, जिससे पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है, वहीं तालाब की जमीन पर कब्जा और खुदाई होने से पानी का बहाव हो सकता है, जिससे आने वाले सालों में पानी की समस्या नासूर बन सकती है।
ये है पिछले तीन वर्ष में औसत बारिश का माप
वर्ष 2016- 882.5 मिली मीटर
वर्ष 2017- 730.4 मिली मीटर
वर्ष 2018- 657.6 मिली मीटर
ये है दिलावरा का क्षेत्र फल
दिलावरा तालाब तिरला जनपद क्षेत्र में आता है, जो डब्ल्यूआरडी के बदनावर क्षेत्र का तालाब है। इसका कुल क्षेत्रफल 74.65 हेक्टेयर है। इसमें निजी डूब की जमीन भी शामिल है।
ये है दिलावरा का जलभरण
दिलावरा तालाब की जलभरण क्षमता 3.7 एमसीएम है। बारिश की कमी और तालाब पर कब्जा दोनों मिलकर शहरी पेयजल कके लिए संकट खड़ा कर रहे हैं।
बारिश छोडक़र डूब की जमीन पर कर सकते हैं खेती
सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना है कि तालाब किनारे डूब में आने वाली जमीन पर खेती हो सकती हे, लेकिन बारिश छोडक़र। दरअसल बरसात के मौसम में यह जमीन डूब जाती है, जिस पर खेती नहीं हाक सकती है। यदि कोई इस समय तालाब की जमीन जोत रहा है तो वह अवैधानिक है और उस पर कार्रवाई की जा सकती है।
क्या हते हैं नपा कर्मी
दिलावरा तालाब पर दिनरात ड्यूटी देने वाले नपा के कर्मचारी नाम बताने से कतरा रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि आसपास गांव के लोग इतने खतरनाक हैं कि उनका यहां आना ही बंद हो जाएगा। बेकार वे इनसे दुश्मनी नहीं लेना चाहते हैं। कर्मचारियों की सफाई है कि हर दूसरे दिन नपा के अफसर तालाब देखने आते हैं। उनके सामने ही तालाब में खुदाई होती रहती है। कार्रवाई करने का उनका अधिकार हे तो वे करें, हम क्या करें।
तालाब में खुदाई करना गलत
किसी भी तालाब में खुदाई की अनुमति नहीं मिल सकती है, क्योंकि काली मिट्टी के बाद रेतीली सतह आने पर सीपेज की स्थिति बन जाती है। भूरी सतह दिखना ही तालाब के लिए हानिकारक है। दिलावरा तालाब पेयजल का बड़ा स्त्रोत है, वहां तो खुदाई की अनुमति मिल ही नहीं सकती है। यदि कोई खुदाई कर रहा हे तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। हम भी जांच करेंगे और तालाब से खुदाई करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।
-मयंक सिंह, एसडीओ, डब्ल्यूआरडी, बदनावर
Published on:
23 Jun 2019 11:49 am
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