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नेशनल हाइवे से महाराष्ट्र से युपी पैदल जा रहे मजदूर, पैरों में पड़े छाले

बायपास नेशनल हाईवे पर चिलचिलाती धुप में भुखे प्यासे पैदल लोगों का पलायन अब भी जारी है। लोग अपने गांव और घरों तक जाने के लिए कोई पैदल तो कोई साइकिल से सफर करने को मजबूर है। लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों गए मजदूरों पर रोजी-रोटी पर संकट आ गया है।

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धार

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sarvagya purohit

Apr 27, 2020

नेशनल हाइवे से महाराष्ट्र से युपी पैदल जा रहे मजदूर, पैरों में पड़े छाले

नेशनल हाइवे से महाराष्ट्र से युपी पैदल जा रहे मजदूर, पैरों में पड़े छाले


नेशनल हाइवे से महाराष्ट्र से युपी पैदल जा रहे मजदूर, पैरों में पड़े छाले
- खाने की व्यवस्था न ग्राम पंचायत कर रही न पुलिस
गुजरी.
बायपास नेशनल हाईवे पर चिलचिलाती धुप में भुखे प्यासे पैदल लोगों का पलायन अब भी जारी है। लोग अपने गांव और घरों तक जाने के लिए कोई पैदल तो कोई साइकिल से सफर करने को मजबूर है। लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों गए मजदूरों पर रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। लॉकडाउन का पहला चरण 14 अप्रैल तो खत्म गया है, लेकिन 3 मई तक समय काटना मजदूरों के लिए मुश्किल है। दिहाड़ी मजदूर गुजरात, महाराष्ट्र से पैदल ही बिहार, यूपी, राजस्थान और प्रदेश के छतरपुर तक सफर पर चल पड़े है। रोजाना सुबह दोपहर शाम तक अलग-अलग राज्यों से सैकड़ों लोग अपना सामान लेकर पलायन करने को मजबूर है। भूखे-प्यासे यह लोग बिना किसी की चिंता किए पैदल ही अपने घरो की ओर चले जा रहे है। जबकि गुजरी पंचायत सहित खलघाट, दुधी, कोठीदा, चिक्टयावड, कुंदा, ढाल, काकड़दा नेशनल हाइवे से लगी हुई है। जनहित में राहगीरों की भोजन की व्यवस्था न ही ग्राम पंचायत कर रही है न ही पुलिस। रास्ते में सामाजिक संगठन ही खाने और पानी की मदद कर देते है तो खा लेते है। राहगीरों का कहना है कि कई बार तो घंटों भूखे-प्यासे रहना पड़ता है। जबकि ग्राम पंचायतों में 30 हजार रुपए भोजन आश्रय पर खर्च करने के आदेश है।
किसी को यूपी तो किसी को बिहार जाना
शनिवार की शाम बायपास से तीन साइकिलों से युवा सूरत से यूपी के लिए निकले। इधर दुर्गेश यादव निवासी (उसका बाजार) जिला सिध्दरा नगर यूपी, सुभाष यादव रेरूआ जिला संत कबीर नगर, मनोज यादव भिकरा जिला गोरखपुर यह तीनों लोग गुजरात के पण्डेशरा हाउसिंग कैलाश नगर सुरत में टाइल्स लगाने का कार्य करते थे। खाने पीने की समस्या के चलते यह हिम्मत कर साइकिल से हजारों किमी का सफर करने चल दिए। इनके चेहरे पर चिंता की लकीरे साफ दिखाई दे रही थी। यह रोजाना 60 से 70 किमी साइकिल चला रहे है।
भूख-प्यास से बिलखते बच्चे भी पैदल चलने को मजबूर है । कई बच्चों के पैरों में तो चप्पल तक नहीं है। पैरों में छाले हो चुके है। रातभर मजबूर लोग सड़क पर पैदल ही जा रहे है। इनकी जेब में पैसे नहीं है।
इधर यूपी जा रहे राहगीर रमाकांत का कहना है कि रास्ते में पुलिस खाने की बजाए डंडे मारकर वापस भगा दे रही है। बात करते-करते इनकी आंखों से आंसू छलक गए। नगर सहित भुखे जा रहे राहगीरो को भोजन जय भीम सैनिक संगठन सहित कई संस्थान करा रही है।