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अधिक मास का पहला प्रदोष व्रत, इस विधि से करें पूजा…

- प्रदोष व्रत 30 को- जानें इस बार क्यों है विशेष

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Deepesh Tiwari

Jul 29, 2023

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हिंदू कैलेंडर में सावन का माह भगवान शिव का महीना कहलाता है, ऐसे में इस बार जहां सावन के मध्य में अधिकमास आने के कारण सावन माह 59 दिनों का हो गया। वहीं इसी के चलते सावन व सावन अधिक मास में मिलाकर कुल 4 प्रदोष व्रत (adhik mas ka pradosh) पड़ रहे हैं। प्रदोष व्रत भगवान शिव के प्रिय होने के चलते यह समय भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विशेष माना गया है। ध्यान रहे हिंदू कैलेंडर के हर माह में सामान्यत: त्रयोदशी तिथि को 2 प्रदोष (शुक्ल व कृष्ण पक्ष) आते हैं। मान्यता है कि इन दिनों में व्रत रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष मनोरथ पूर्ण करने के अलावा शुभ फल भी प्रदान करती है। ऐसे में अब तक जहां सावन का पहला प्रदोष बीत चुका है वहीं इस बार रविवार, 30 जुलाई को सावन अधिक मास का प्रदोष (adhik mas ka pradosh vrat) पड़ रहा है।

यह प्रदोष अधिक मास में रविवार को होने के चलते रवि प्रदोष (Ravi Pradosh Vrat) कहलाएगा। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा से रोग, दोष व दुख का नाश होता है। वहीं इस बार अधिक मास के प्रदोष (adhik mas ka pradosh) में कुछ शुभ योग भी बन रहे हैं, जिसके चलते यह प्रदोष कई मायनों में विशेष हो गया है, तो चलिए जानते हैं कि इस प्रदोष में कौन से शुभ योग कब बन रहे हैं...

प्रदोष व्रत- बन रहे ये शुभ योग
सावन अधिक मास के पहले और सावन के दूसरे प्रदोष व्रत (adhik mas ka pradosh vrat) के दिन इस बार रवि योग, इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग हो रहा है। इसके तहत जहां सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06.10 बजे से 09.02 बजे तक रहेगा तो वहीं रवि योग सुबह 09.02 बजे से अगले दिन यानि सोमवार की सुबह 06.11 बजे तक रहेगा। इनके अलावा इंद्र योग शनिवार, 29 जुलाई को सुबह 09.34 बजे से शुरु होकर रविवार 30 जुलाई को सुबह 06.34 बजे तक रहेगा।

ये समस्त योग पूजा पाठ के लिए अत्यंत विशेष माने जाते हैं। खास बात ये हैं कि रविवार यानि जिस दिन प्रदोष व्रत (adhik mas ka pradosh) रखा जाना है उस दिन ये सभी योग कहीं कहीं ओवरलेप कर रहे हैं, तो कहीं इनके मध्य चंद मिनटों का ही अंतर आ रहा है।

सावन अधिक मास प्रदोष व्रत 2023(adhik mas ka pradosh vrat 2023)- ऐसे करें पूजा
^ सावन अधिक मास के प्रदोष व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के पश्चात पूजा के लिए साफ वस्त्र धारण करें।
^ इसके बाद पूजा घर में दीपक जलाते हुए व्रत का संकल्प लें।

^ अब पूरे दिन व्रत रखने के साथ ही प्रदोष काल में भगवान शिव जी की पूजा और उपासना करें। साथ ही माता पार्वती की भी पूजा करें, ध्यान रहे माता पार्वती की पूजा के बिना भगवान शिव की पूजा अधूरी मानी जाती है।
^ शिव पूजा के तहत शाम के समय प्रदोष काल में पूजा के समय दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।
^ इसके साथ ही शिवलिंग पर भांग, धतूरा, बेलपत्र फूल और नैवेद्य आदि अर्पित करें।
^ अब भगवान शिव की प्रतिमा के पास धूप-दीप जला कर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें या सुनें।
^ अंत में शिवजी की आरती करके पूजा समाप्त करें।