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Akhand Deep : 92 साल से जल रहे इस सिद्ध अखण्ड दीप के दर्शन मात्र से हो जाती हैं हर मनोकामना पूरी

92 साल से जल रहे इस सिद्ध अखण्ड दीप के दर्शन मात्र से हो जाती हैं हर मनोकामना पूरी

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भोपाल

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Shyam Kishor

Oct 19, 2018

akhand deep darshan

Akhand Deep : 92 साल से जल रहे इस सिद्ध अखण्ड दीप के दर्शन मात्र से हो जाती हैं हर मनोकामना पूरी

भारतीय संस्कृति के आधार वेद शास्त्रों में उल्लेख आता हैं कि यदि गाय के घृत से कोई दीपक लगातार 24 वर्षों तक जलता रहे, तो वह स्वतः ही सिद्ध हो जाता है, औरे ऐसे सिद्ध दीपक के दर्शन मात्र से ही जन्मजन्मातंरों के अनेकानेक पापों का नाश हो जाता है, और अनेक इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं । ऐसा ही एक सिद्ध अखण्ड दीपक हरिद्वार में स्थित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में है, जो पिछले 92 वर्षों से गाय के घृत सी ही जल रहा हैं । इस दीपक के साथ युगशक्ति वेदमाता गायत्री की एक मनमोहक मूर्ति भी है । इसके सामने खड़े होकर कवेल 11 बार गायत्री मंत्र का जप करने से जटील से जटील समस्याओं का समाधान हो जाता हैं ।

हरिद्वार स्थित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के संस्थापक युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने आज से 92 साल पहले सन 1926 में इस सिद्ध अखण्ड दीपक को गाय के घी से प्रज्वलित किया था, और इसी दीपक के सामने बैठकर गायत्री महामंत्र का जप करते हुए गायत्री के 24 महापुरश्चरण अर्थात 24 हजार करोड़ गायत्री महामंत्र जप का अनुष्ठान संपन्न किया था । स्वयं आचार्य श्रीराम शर्मा जी जो गायत्री के सिद्ध साधक ने इस दिव्य दीपक के सामने आजीवन गायत्री महामंत्र की साधना करके अनेक ऋद्धि सिद्धियां प्राप्त की ।

आचार्य श्री कहा करते थे की यह दीप सामान्य दीपक नहीं बल्की गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की आत्मा हैं और आद्यशक्ति वेदमाता गायत्री स्वयं यहां निवास करती हैं । इसके प्रकाश में बैठकर साधना करने से मन में दिव्य भावनाएं उठने लगती हैं । कभी किसी उलझन को सुलझाना हमारी सामान्य बुद्धि के लिए संभव नहीं होता, तो इस अखंड ज्योति की प्रकाश किरणें खुद ही उस उलझन को सुलझा देती हैं ।

वर्तमान में गायत्री परिवार के प्रमुख शैल बाला पंड्या एवं डॉ. प्रणव पंड्या कहते हैं कि मनुष्य में देवत्व उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण के पवित्र उद्देश्य से युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने इस सिद्ध अखण्ड ज्योति के प्रज्वलन के साथ ही अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना भी की थी, और तब से लेकर आज तक गायत्री परिवार निरंतर व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण के उत्थान और सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रहा हैं ।

वसुधैव कुटुंब की भावनाओं को जगाने वाले इस दीपक के दर्शन से आज भी यहां आने वाले साधक, दर्शनार्थी मन, प्राण में महानता की ओर कदम बढ़ाने की उमंगे उठने के साथ उनकी अनगिनत इच्छाएं पूरी हो जाती हैं । 92 सालों से इस गाय के घृत से जल रहे अखण्ड दीपक के सामने देवकन्याएं सुबह 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेया शैल जीजी स्वयं भी ब्राह्ममुहूर्त में, दोपहर एवं संध्याकालीन ध्यान-साधना नियमित रूप सम्पन्न करती हैं । साथ विश्व भर में फैले गायत्री मंत्र के साधक भी इसी अखण्ड दीपक का ध्यान करते हैं । यह सिद्ध दीपक व्यक्ति के जीवन में शुभ परिवर्तन की प्रेरणा भरता है । आचार्य श्री कहते थे कि अखंड दीपक से प्रेरणा के दो स्वरूप सहज ही झरते रहते हैं, एक पवित्रता, दूसरी प्रखरता ।

आज भी लाखों गायत्री मंत्र के साधक अपने दैनिक कार्यों का आरंभ इसी अखण्ड दीपक के ध्यान से करते हैं । इस अखंड दीपक का दर्शन प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु करते हैं, करने आते हैं । धर्म गुरु दलाई लामा, योग गुरु बाबा रामदेव, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत, मध्यप्रदेश के कई पूर्व एवं वर्तमान मुख्यमंत्री, श्रीश्री रविशंकर, आरएसएस के रज्जु भैया तथा मोहन भागवत, अमित शाह से लेकर फिल्म अभिनेता गोविंदा, जैसी फिल्मी, धार्मिक, राजनीतिक हस्तियों ने इस दीपके के दर्शनों के लिए गायत्री तीर्थ पहुंचे हैं । सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले इस दीपके दर्शन करने एक बार आप भी अवश्य पहूंचे मां गायत्री सभी की सात्विक इच्छाएं पूरी कर देती हैं ।