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Garhmukteshwar Temple Mysteries: गढ़मुक्तेश्वर का रहस्यमयी गंगा मंदिर, सदियों से छिपे हैं अनसुलझे राज

Mysterious Ganga Temple of Garhmukteshwar : गढ़मुक्तेश्वर के प्राचीन गंगा मंदिर के रहस्य जानें! शिवलिंग से निकलते अंकुर, सीढ़ियों पर गंगा की आवाज़, नृगकूप और महाभारत कथाएं। चमत्कारों से भरा ये शिव धाम आस्था का केंद्र।

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भारत

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Manoj Vashisth

Jan 19, 2026

Garhmukteshwar Temple Mysteries

Garhmukteshwar Temple Mysteries: गढ़मुक्तेश्वर का रहस्यमयी गंगा मंदिर, सदियों से छिपे हैं अनसुलझे राज

Garhmukteshwar Temple Mysteries: गढ़ मुक्तेश्वर का प्राचीन गंगा मंदिर, सच कहूं तो, अपने आप में एक रहस्य है। भगवान शिवशंकर की महिमा का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। धर्मग्रंथों में भी ये बात बार-बार आती है, और आज भी यहां ऐसे कई शिवभक्त मिल जाते हैं, जिनकी आस्था देख हर कोई सिर झुका देता है।

मजेदार बात ये है कि यहां के चमत्कारों ने पुरातत्वविदों तक को चौंका दिया है। हर साल मंदिर में रखे शिवलिंग से एक छोटा अंकुर निकलता है। जब वो टूटता है, तो उसमें भगवान शिव और दूसरे देवी-देवताओं की आकृतियां दिखने लगती हैं। इस पर कई बार रिसर्च हुई, लेकिन आज तक कोई नहीं समझ पाया कि ये अंकुर आखिर आता कहां से आता है। पुजारी इसे मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति मानते हैं।

गढ़ मुक्तेश्वर में एक और किस्सा भी घूमता है

लोग कहते हैं कि अगर मंदिर की सीढ़ियों पर पत्थर फेंको, तो वैसे ही आवाज़ आती है जैसे कोई पत्थर पानी में फेंके। ऐसा लगता है मानो गंगा खुद सीढ़ियों को छू रही हो। अब तक कोई नहीं जान पाया कि ये क्यों होता है।

मंदिर के रहस्य का एक सिरा शिव पुराण की कहानी से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि महर्षि दुर्वासा ने शिवगणों को उनके मजाक के लिए श्राप दिया था, और फिर गंगा के किनारे इसी जगह आकर मोक्ष पाया। इसी वजह से पहले इस जगह का नाम 'गण मुक्तेश्वर' था, जो वक्त के साथ 'गढ़ मुक्तेश्वर' बन गया।

यहां एक प्राचीन बावड़ी भी है 'नृगकूप'। महाभारत की कहानी के मुताबिक, राजा नृग को श्राप मिला था और वे गिरगिट बनकर इसी कुएं में रहे थे। आज भी लोग इसे 'नक्का कुआं' कहते हैं।

कुछ लोग मानते हैं, इस मंदिर में जो शिवलिंग से अंकुर निकलते हैं, वो विज्ञान की समझ से बाहर हैं। पुजारी इसे सिर्फ मंदिर की अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा मानते हैं।

इतिहास की बात करें तो यह मंदिर महाभारत काल से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि राजा परीक्षित अपनी मृत्यु के बाद मोक्ष की तलाश में यही आए थे। गढ़ मुक्तेश्वर का ये मंदिर, सच में, रहस्यों और आस्था का अनोखा संगम है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।