
गणेश चतुर्थी पर उपवास और यज्ञ के लाभ
[typography_font:18pt]संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है । इस व्रत को माघ, श्रावण, मार्गशीर्ष और भाद्रपद में करने का भी विशेष महत्व है । भविष्य पुराण में कहा गया है कि जब मन संकटों से घिरा महसूस करे, तो संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत करें । इसको करने से विघ्नहर्ता श्री गणेश सभी कष्ट दूर करते हैं और धर्म, धन व विद्या के साथ आरोग्य भी प्रदान करते हैं । व्रत वाले दिन श्री गणेश जी की यह वन्दना करने से वे प्रसन्न होते है,
[typography_font:18pt]श्री गणेश वन्दना
[typography_font:18pt]वर्णानामर्थसंघानाम रसानाम छंदसामपि ।
[typography_font:18pt]मंगलानाम च कर्तारौ वंदे वाणीविनायकौ ।।
[typography_font:18pt]गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजंबू फल चारु भक्षणम ।
[typography_font:18pt;" >उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विंधेश्वर पादपंकजम ।।
- व्रत रखने वाला व्यक्ति सीधे हाथ में फूल, अक्षत, गंध व जल लेकर संकल्प करे कि ‘अमुक मास पक्ष और तिथि में विद्या, धन, समस्त रोगों और संकटों से मुक्ति के लिए श्री गणेश जी को प्रसन्न रखने के लिए मैं संकष्ट चतुर्थी का व्रत कर रहा हूं ।
मंत्र ॐ गं गणपतये नमो नमः से 251 बार या 108 बार लड्डुओं से या शुद्ध हवन सामग्री में गाय का घी मिलाकर यज्ञ करें । हवन करने के बाद प्रसाद बाटकर सामर्थय अनुसार दान करने से अधिक लाभ मिलता है ।
[typography_font:18pt]श्रीविप्राय नमस्तुभ्यं साक्षाद्देवस्वरूपिणे ।
[typography_font:18pt;" >गणेशप्रीतये तुभ्यं मोदकान वे ददाम्यहम । ।
- शाम को जब चांद निकले तब चंद्रमा का पूजन कर कलश के जल का अर्ध्य देते हुए गणपति का ध्यान करते हुए कहे कि ‘हे देव ! मेरे सभी संकट दूर करें । इसके बाद किसी सुपात्र ब्राहम्ण या 5 कन्याओं को भोजन करावें । यदि संभव हो तो 12 महीनों तक इस व्रत को करने का संकल्प लें । यह भी ना हो सके तो वर्ष के किसी एक महीने में यह व्रत करें । ज्येष्ठ महिने की कृष्ण पक्ष तिथि को - संभव हो तो दयादेव नामक ब्राह्मण की कथा भी पढ़ सकते है ।
Published on:
04 May 2018 02:12 pm
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