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Chaitra Navratri 2021: नवरात्रि में दस महाविद्याओं की आराधना से पूर्ण होती हैं सभी मनचाही इच्छाएं

Chaitra Navratri 2021: नवरात्रि में भक्त और साधक अपने इष्ट की तंत्रोक्त आराधना कर उन्हें प्रसन्न कर मनचाहा वरदान प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस समय शाक्त साधक भगवती आद्यशक्ति की विभिन्न रूपों में पूजा-अर्चना करते हैं जिनमें दस महाविद्या सबसे प्रमुख मानी जाती हैं।

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Sunil Sharma

Apr 13, 2021

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Chaitra Navratri 2021: महाविद्या शब्द संस्कृत भाषा के शब्दों "महा" (अर्थात् महान्, विशाल, विराट) तथा "विद्या" (अर्थात् ज्ञान)। अनन्त, अनादि, विराट परमेश्वर का ज्ञान ही महाविद्या कहलाता है। शाक्त मत के शास्त्रानुार जगदम्बा ही इस सृष्टि की सृजक, संचालक तथा संहारक हैं। वे अपने दस विभिन्न रूपों द्वारा ब्रह्माण्ड की रचना, संचालन तथा संहार के कार्य का नियमन करती हैं। इन रुपों को क्रमश: (1) काली, (2) तारा, (3) छिन्नमस्ता, (4) षोड़शी, (5) भुवनेश्वरी, (6) त्रिपुरभैरवी, (7) धूमावती, (8) बगलामुखी, (9) मातंगी तथा (10) कमला कहा जाता है। इन दस महाविद्याओं को भगवान विष्णु के दस अवतारों से भी संबद्ध माना जाता है। साधक लोग इनकी अपने अपने विचारानुसार व्याख्या करते हैं।

भगवती देवी के इन दस रूपों को दो कुल काली कुल तथा श्री कुल में विभक्त किया गया है। कुछ ऋषि देवी के इन रुपों को प्रकृति के अनुसार उग्र, सौम्य तथा सौम्य-उग्र रुपों में भी विभक्त करते हैं। उग्र में काली, छिन्नमस्ता, धूमावती और बगलामुखी है। सौम्य में त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी और महालक्ष्मी (कमला) है। तारा तथा भैरवी को उग्र तथा सौम्य दोनों माना गया हैं।

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1. काली
इनकी साधना बीमारी के नाश, दुष्ट आत्माओं व ग्रह, अकाल मृत्यु के भय से बचने के लिए, वाक सिद्धि, कवित्व की सिद्धी पाने के लिए किया जाता है। इनका मंत्र निम्न प्रकार है-
“ॐ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहाः”

2. तारा
तारा को तारिणी भी कहा गया है। ये अपने भक्त को एक माता की तरह पालन करती है। इनकी साधना से भोग तथा मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। इनका मंत्र है-
“ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट”

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3. त्रिपुर सुंदरी
ये साक्षात परम परमेश्वरी है जो अपने साधक को हर कष्ट से बाहर निकालने में सक्षम हैं। इनकी आराधना निम्न मंत्र के द्वारा की जाती है-
“ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः “

4. भुवनेश्वरी
यह देवी बहुत ही कम समय मे प्रसन्न हो जाती है तथा मनचाहा वरदान देती है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए।
“ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमः”

5. छिन्नमस्ता
इनकी साधना अत्यन्त तीव्र मानी जाती है। यह देवी शत्रु का तुरंत नाश करने वाली, वाकसिद्धी देने वाली, रोजगार में सफलता, नौकरी में पदोन्नति के लिए, कोर्ट केस आदि में तुरंत राहत दिलाती है। इनकी साधना से किसी को भी अपने वश में किया जा सकता है। इनकी पूजा निम्न मंत्र से की जाती है-
“श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीयै हूं हूं फट स्वाहा:”

6. त्रिपुर भैरवी
भूत-प्रेत आदि समस्याओं के निवारण के लिए मां त्रिपुर भैरवी की साधना की जाती है। ये भक्तों को समस्त तांत्रिक प्रयोगों से बचाए रखती हैं तथा उनकी हर अभिलाषा पूर्ण करती हैं। इनका मंत्र निम्न प्रकार है-
“ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा:”

7. धूमावती
इनकी साधना से समस्त प्रकार की दरिद्रता का नाश होता है और दूसरों के द्वारा किए गए तंत्र-मंत्र का असर समाप्त होता है। इनकी आराधना निम्न मंत्र से की जाती है-
“ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा:”

8. बगलामुखी
शत्रुओं का नाश करने वाली मां बगलामुखी की आराधना तभी की जाती है जब अन्य कोई मार्ग न शेष रहा हो। यह संहारक शक्ति है जो प्रबल से प्रबल शत्रु का भी नाश कर देती है। इन्हीं पूजा में निम्न मंत्र का उपयोग किया जाता है-
“ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नम:”

9. मातंगी
यह भगवती का सौम्य स्वरूप है। जीवन में किसी भी वस्तु की प्राप्ति के लिए इनकी आराधना की जा सकती है। ये शीघ्र प्रसन्न होती है और मनवांछित वर देती हैं। इनका मंत्र निम्न प्रकार है-
“ॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा:”

10. कमला
दीवाली पर इन्हीं को लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है। इनकी आराधना से संसार के समस्त भोग, ऐश्वर्य अथवा सुंदर वस्तुओं को प्राप्त किया जा सकता है। इनकी आराधना में निम्न मंत्र का उपयोग किया जाता है-
“ॐ हसौ: जगत प्रसुत्तयै स्वाहा:”