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इस माता की 11 दिनों तक केवल 7 परिक्रमा करने से दूर हो जाती हैं पैसों से जुड़ी हर समस्या

इस माता की 11 दिनों तक केवल 7 परिक्रमा करने से दूर हो जाती हैं पैसों से जुड़ी हर समस्या

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भोपाल

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Shyam Kishor

Mar 07, 2019

dhan prapti

इसकी 11 दिनों तक केवल 7 परिक्रमा करने से दूर हो जाती हैं पैसों से जुड़ी हर समस्या

छोटा हो या बड़ा, गरीब हो या अमीर किसी के भी कोई भी कार्य आज के समय में बिना पैसों के शायद ही संभव हो सके । लोग धन प्राप्ति के लिए लोग आये दिन तरह तरह के उपाय, टोने टोटके भी करते रहते है, कुछ को थोड़ी बहुत सफलता मिल भी जाते हैं । अगर आप अपने जीवन के सारे अभाव हमेशा को लिए दूर करना चाहते हो तो 33 कोटि देव एक जहां निवास करते है उसके 11 दिन तक केवल 7 परिक्रमा करने से पैसों की समस्या खत्म हो जाती है ।

धर्म शास्त्रों के अनुसार गाय माता एक ऐसा प्राणी हैं जिसके शरीर में एक दो नहीं- बल्कि पूरे 33 कोटि देवी देवता निवास करते हैं । अगर लगातार 11 दिनों तक सुबह एवं शाम के समय गोधुली बेला में देशी गाय का पूजन करने के बाद 7 परिक्रमा लगाने से व्यक्ति को जीवन में धन, वैभव, यश कीर्ति, मान सम्मान सहित हर मनोकामना पूरी हो जाती हैं ।

गाय माता की महिमा के बारे में हमारे शास्त्र-ग्रंथों, ऋषि, संत महात्मा एवं अनेक महात्माओं नें अपने अपने शब्दों में अद्भूत बखान किया हैं-


1- भगवान कृष्ण ने श्रीमद् भगवतगीता ग्रंथ में कहा है ‘धेनुनामसिम’ मैं गायों में कामधेनु हूं ।
2- बाल गंगाधर तिलक ने कहा था, चाहे मुझे मार डालो पर गाय पर हाथ न उठाऊंगा ।
3- याग्यवल्क कहते है- गाय के घी से हवन करने पर वातावरण की मलिनता खत्म हो जाती हैं ।
4- ईसा मसीहा ने कहा हैं कि- एक गाय को मारना, एक मनुष्य को मारने के के पाप से ज्यादा महापाप है ।
5- मुस्लिम संत रसखान ने कहा हैं कि- यदि ईश्वर मुझे दोबारा धरती पर जन्म दे तो में पशु के रूप गायों के गर्भ से जन्म लूं ।
6- भगवान शिव की सबसे प्रिय श्री सम्पन्न ‘बिल्वपत्र’ की उत्पत्ति गाय के गोबर से ही हुई थी ।
7- स्कन्द पुराण में कहा गया है- ‘गौ सर्वदेवमयी और वेद सर्वगौमय है’ ।
8- महर्षि अरविंद ने कहा था की- ‘गौ’ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की धात्री होने के कारण कामधेनु है, इसका अनिष्ट चिंतन ही पराभव का कारण है ।
9- स्वामी विवेकानंद ने कहा है, गाय की परिक्रमा करने से संपूर्ण ब्रह्माण्ड की परिक्रमा का पुण्यफल स्वतः ही मिल जाता हैं ।
10- गुरु गोबिंद सिंह कहते है कि- ‘यही देहु आज्ञा तुरुक को खापाऊं, गौ माता का दुःख सदा मैं मिटआऊँ ।


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