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सावन में यह विशेष फल चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ, भर देते हैं महिलाओं की सूनी गोद

शिवजी को यह फल अर्पित करें, निसंतानों के घर जन्म लेगी संतान

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Shyam Kishor

Aug 06, 2018

dhatura ka phal

सावन में यह विशेष फल चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ, भर देते हैं महिलाओं की सूनी गोद


कहा जाता हैं कि सावन का महीना आता ही हैं मनुष्यों के दुख दर्द को हरने के लिए, इसलिए सावन में जो भी सच्चे श्रद्धाभाव से शिवजी की आराधना करते हैं उनकी सभी इच्छाएं पूरी होकर ही रहती हैं । अगर किसी के घर में बच्चे की किलकारी नहीं गूंज रही हैं, किन्हीं माताओं की गोद सूनी हैं हर संभव प्रयास के बाद भी संतान सुख नहीं मिल पा रहा हैं, तो इस सावन में हर रोज किसी प्राचीन शिवलिंग पर इस फल को अवश्य चढ़ाएं, ऐसी मान्यता हैं कि भोलेनाथ इस फल को चढ़ाने से प्रसन्न होकर निसंतानों को संतान सुख प्रदान करते हैं ।

इस फल को चढ़ाये शिवलिंग पर


1-संतान सुख-
कहा जाता है कि धतूरा का फल जो भी निसंतान दम्पत्ति सावन के मास में श्रद्धापूर्वक संतान की कामना से किसी प्राचीन शिवलिंग पर अर्पित करते हैं तो भगवान शिवजी भोलेनाथ की कृपा से उन्हें संतान सुख मिलता ही हैं । इसके फल सेब की तरह गोल होते हैं और फल के ऊपर छोटे-छोटे कांटे होते हैं । धतूरे चार प्रकार के होते हैं - काला, सफेद, नीला व पीला आदि ।


2- धनलाभ-
अगर कोई सावन के किसी भी सोमवार या अमास्या के दिन धतूरे की जड़ को घर में स्थापित करके माता महाकाली का पूजन कर 'क्रीं' बीज मंत्र का 1100 बार जप करें तो उनकी धन सबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं ।

3- विपत्ति से रक्षा
अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ को घर में लाकर स्थापित करने से घर में सर्प नहीं आते और आयेंगे भी तो कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं ।

4- ऊपरी हवा से रक्षा
काले धतूरे की जड़, काले धतूरे का पौधा सामान्य धतूरे जैसा ही होता है, इसके फूल सफेद की जगह गहरे बैंगनी रंग के होते हैं तथा पत्तियों में भी कालापन होता है । अगर काले धतूरे की जड़ को सावन मास के रविवार, मंगलवार या किसी शुभ नक्षत्र में घर में स्थापित करने से घर में ऊपरी हवाओं का असर नहीं होता, सुख -चैन बना रहता है तथा धन आवक में वृद्धि होती है ।

शिवजी को पूजा मे धतूरे जैसा विषाक्त फल चढ़ाने के पीछे भी भाव यही है कि व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में कटु व्यवहार और कटु वाणी से बचें ।


शिव को धतूरा प्रिय होने के पीछे संदेश यही है कि शिवालय मे जाकर शिवलिंग पर केवल धतूरा ही न चढ़ाएँ बल्कि अपने मन और विचारों की कड़वाहट भी शिवजी को अर्पित करें । ऐसा करने से ही शिवजी प्रसन्न होते हैं क्योंकि " शिव " शब्द के साथ सुख, कल्याण व अपनत्व भाव ही जुड़े हैं ।