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पोरा पर गली-मोहल्लों में दौड़ लगाने को तैयार मिट्टी के बैल

लोकपर्व: 27 को मनाया जाएगा खेती-किसानी के सम्मान का त्योहार

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पोरा पर गली-मोहल्लों में दौड़ लगाने को तैयार मिट्टी के बैल

पोरा पर गली-मोहल्लों में दौड़ लगाने को तैयार मिट्टी के बैल

रायपुर. प्रदेश का लोकपर्व पोरा (पोला) 27 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन शहर की गलियों और मोहल्लों में दौड़ लगाने के लिए नांदिया बइला (मिट्टी के बैल) तैयार हो गए हैं। बाजारों में बिक्री के लिए पहुंचे इन बैलों की कीमत 40 से 80 रुपए प्रति जोड़ी है। जांता-पोरा और मिट्टी के दूसरे खिलौने भी 120-160 रुपए तक उपलब्ध हैं।
इधर, रावणभाठा मैदान में असली बैलों के बीच 2 साल बाद दौड़ प्रतियोगिता होने वाली है। कोरोनाकाल में परंपरा का निर्वहन करने के लिए यहां केवल बैलों की पूजा की गई थी। दौड़ नहीं कराई गई थी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव एवं विकास समिति ने इस बार धूमधाम से प्रतियोगिता कराने की तैयारी की है। आयोजन समिति के अध्यक्ष माधवलाल यादव ने बताया कि मैदान ले जाने से पहले सभी बैलों को सजाया जाएगा। इसमें शामिल होने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान अपने बैलों को सजाकर रावणभाठा पहुंचेंगे।
परंपरा को पुनर्जीवित करने 14 साल से करवा रहे स्पर्धा
छत्तीसगढ़ में पोरा पर बैलों को सजाने और दौड़ कराने की परंपरा पुरानी है, लेकिन पिछले कुछ समय से इसका चलन कम हो गया है। इसे पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव एवं विकास समिति ने 14 साल पहले रावणभाठा मैदान में बैल दौड़ की शुरुआत की थी। तब से पोरा पर आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान यहां अपने बैलों के साथ जुटते हैं। जीतने वाले बैलों और उनके मालिकों को इनाम के तौर पर हजारों रुपए दिए जाते हैं। 2020 और 2021 में यह प्रतियोगिता कोरोना महामारी के चलते रद्द कर दी गई।