
वेदों में इसी मंत्र को कहा गया है गुरु मंत्र, जो करता है हर कामना पूरी
चारों वेदों में वैसे तो अनेक मंत्र दिए गए लेकिन एक मंत्र ऐसा हैं जिसके बारे में हमारे अनेक प्राचीन ऋषियों ने शोध किया है। शोध के बाद ऋषियों ने पाया है कि यह मंत्र जपकर्ता के जीवन को पवित्र बनाने के साथ सभी तरह की भौतिक और आध्यात्मिक कामनाएं पूरी कर देता है। जो व्यक्ति उक्त महा शक्तिशाली मंत्र का जप हर रोज इतनी बार सूर्योदय के समय करता है उसके जीवन में किसी भी चीज का अभाव नहीं रहता है।
जिस दिव्य मंत्र का बखान सभी चारों वेदों में किया गया है, वह गायत्री महामंत्र। नियमित गायत्री मंत्र के जप करने वाले की अनेकों मनोकामनाएं पूरी होकर ही रहती है। कम से कम इतने बार हर रोज ऐसे जपें गायत्री मंत्र।
1- सुबह बिस्तर से उठते ही अष्ट कर्मों को जीतने के लिए 8 बार गायत्री महामंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
2- सुबह सूर्योदय के समय एकांत पूजा में बैठकर से 3 माला या 108 बार नित्य जप करने से वर्तमान एवं भविष्य में इच्छा पूर्ति के साथ सदैव रक्षा होती है।
3- भोजन करने से पूर्व 3 बार उच्चारण करने से भोजन अमृत के समान हो जायेगा ।
4- हर रोज घर से पहली बार बाहर जाते समय 5 या 11 बार समृद्धि सफलता, सिद्धि और उच्च जीवन के लिए उच्चारण करना चाहिए।
5- किसी भी मन्दिर में प्रवेश करने पर 12 बार परमात्मा के दिव्य गुणों को याद करते हुये गायत्री मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
6- अगर छींक आ जाए तो उसी समय 1 बार गायत्री मंत्र का उच्चारण करने से सारे अमंगल दूर हो जाते हैं।
7- रोज रात को सोते समय 11 बार मन ही मन गायत्री मंत्र का जप करने से 7 प्रकार के भय दूर हो जाते हैं एवं दिन भर की सारी थकान दूर होते ही गहरी नींद आ जाती है।
गायत्री महामंत्र को सूर्य देवता की उपासना साधना के लिये भी प्रमुख माना जाता है। इसलिए इसका जप या उच्चारण करते समय भाव करें कि- हे प्रभू! आप हमारे जीवन के दाता है, आप हमारे दुख़ और दर्द का निवारण करने वाले है, आप हमें सुख़ और शांति प्रदान करने वाले है, हे संसार के विधाता हमें शक्ति दो कि हम आपकी ऊर्जा से शक्ति प्राप्त कर सके और आपकी कृपा से हमारी बुद्धि को सही राह प्राप्त होने लगे।
गायत्री महामंत्र
।। ॐ भूर्भुवः स्वःतत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।।
अर्थात- उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।
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Updated on:
20 May 2020 12:09 pm
Published on:
20 May 2020 12:09 pm
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