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गुरु चांडाल दोष निवारण के लिए सर्वोत्तम है यह समय, सालों बाद बन रहा ये विशेष योग

गुरु चांडाल दोष निवारण के लिए सर्वोत्तम है यह समय, सालों बाद बन रहा ये विशेष योग
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भोपाल

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Tanvi Sharma

Oct 08, 2018

chandal yog

गुरु चांडाल दोष निवारण के लिए सर्वोत्तम है यह समय, सालों बाद बन रहा ये विशेष योग

देवगुरु बृहस्पति यानी गुरु ग्रह 11 अक्टूबर 2018 को वृश्चिक राशि में प्रवेश करने वाले है। फिलहाल गुरु तुला राशि में विराजमान हैं। गुरु के इस परिवर्तन से सभी राशियों के जातकों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ने वाला है क्योंकि इस परिवर्तन की अवधि एक साल से ज्यादा रहेगी। पंडित रमाकांत मिश्रा ने बताया की गुरु वृश्चिक राशि में 5 नवंबर 2019 तक रहेंगे। इस एक साल की अवधि के दौरान गुरु ग्रह कई नक्षत्रों का भ्रमण करते हुए दूसरी राशि यानि धनु राशि में गोचर करेंगे। गुरु वृश्चिक राशि में गोचर के दौरान विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल नक्षत्रों में भ्रमण करते हुए धनु राशि में पहुंचेंगे और वक्री होते हुए फिर से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र होकर मार्गी होंगे और आखिर में धनु राशि में प्रवेश करेंगे।

पंडित रमाकांत मिश्रा ने बताया की 11 अक्टूबर को गुरु के राशि परिवर्तन के साथ ही यह समय गुरु चांडाल दोष का निवारण के लिए विशेष बन रहा है। क्योंकि गुरुवार के दिन गुरु ग्रह का राशि परिवर्तन होने जा रहा है। इस दिन राहु ग्रह का नक्षत्र स्वाति योग भी बन रहा है। यह योग उन लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद है जिन जातकों की कुंडली में गुरु चांडाल योग बन रहा है। इस योग के कारण वे गुर चांडाल दोष निवारण की पूजा करवा सकते है।

क्या होता है गुरु चांडाल योग

राहु-गुरु की युति या दृष्टि संबंध बनने से चांडाल योग बनता है और इस योग को गुरु चांडाल योग कहा जाता है। इस योग की सबसे बड़ी बात यह है कि गुरु ज्ञान, धर्म, सात्विक, पंडित्व का कारक है, तो राहु अनैतिक संबंध, अनैतिक कार्य, जुआ, सट्टा, नशाखोरी, अवैध व्यापार का कारक है। चांडाल योग के दुष्प्रभाव के कारण जातक का चरित्र भ्रष्ट हो सकता है। ऐसा जातक अनैतिक अथवा अवैध कार्यों में संलग्न हो सकता है। इस दोष के निर्माण में बृहस्पति को गुरु कहा गया है तथा राहु को चांडाल माना गया है। गुरु का इन चांडाल माने जाने वाले ग्रह से संबंध स्थापित होने से कुंडली में गुरु चांडाल योग का बनना माना जाता है।