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मुस्लिम भक्त की इबादत से खुश होकर, रूक गये थे भगवान जगन्नाथ

मुस्लिम भक्त की इबादत से खुश होकर, रूक गये थे भगवान जगन्नाथ

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Shyam Kishor

Jul 14, 2018

jagannath rath yatra

मुस्लिम भक्त की इबादत से खुश होकर, रूक गये थे भगवान जगन्नाथ

भगवान के लिए भक्त किसी जाती धर्म के नहीं होते भगवान को तो केवल भक्त की सच्ची श्रद्धा और समर्पण ही परम प्रिय होती हैं, ऐसा ही एक किस्सा पुरी के भगवान की निकलने वाले रथयात्रा से जुड़ा हुआ है । एक बार जिस दिन रथयात्रा निकलने वाली थी उस दिन मुस्लिम भक्त सालबेग पुरी शहर से बाहर थे, उन्हें लगा की वे समय पर रथयात्रा देखने के लिए पुरी शहर नहीं नहीं पाएंगे । भक्त सालबेग ने दुखी मन से प्रभु जगन्नाथ जी से विनती की, कि हे नाथ मेरे पुरी शहर पहुंचने तक आप मेरा इंतजार करना, फिर क्या हुआ भगवान जगन्नाथ ने अपना भक्त का बात मान ली और रथयात्रा निर्धारिक समय से कुछ घंटे देरी से निकली ।

परम दयालु भगवान श्री जगन्नाथ को भक्तों का भगवान कहा जाता है, जब-जब भक्तों ने भक्ति भीव से पुकारा हैं उसके साथ भगवान खड़े हुए नजर आए. यह कहा जाता है जब जगन्नाथ जी को डोरी नहीं लगता तब तक प्रभु का दर्शन नहीं हो पाता है, ऐसी अनेक प्रसंग है जब भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के विश्वास पर खड़े उतरे हैं । कभी तो प्रभु अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए स्वयं निकल पड़ते हैं तो कभी दासिया नाम के एक दलित भक्त के हाथ से नारियल उठा लेते हैं ।

मुस्लिम भक्त सालबेग


कहा जाता कि भक्त सालबेग जो की मुस्लिम धर्म से था, लेकिन प्रभु जगन्नाथ के प्रति उसकी निश्चल भक्ति ने उसे श्री भगवान का सबसे बड़ा भक्त बना दिया । मुस्लिम भक्त सालबेग के पिता मुगल आर्मी में सैनिक थे, और भक्त सालबेग भी मुगल आर्मी में काम करते थे । एक बार युद्ध के दौरान भक्त सालबेग गंभीर घायल हो गए, जब सालबेग ठीक नहीं हो रहे थे तो भक्त सालबेग अपनी मां के कहने पर भगवान जगन्नाथ की शरण में गए, भगवान की कृपा से सालबेग शीघ्र ही पूरी तरह ठीक हो गया । भक्त सालबेग ने श्री जगन्नाथ जी की भक्ति में अनेक भक्तिमय कविता भी लिखी ।

जब भक्त सालबेग को दर्शन देने के लिए रूक गया रथ


एक बार रथयात्रा के दिन भक्त सालबेग पुरी से बाहर थे, उन्हें लगा की समय पर रथ यात्रा देखने के लिए वह पुरी पहुंच नहीं पाएंगे, फिर सालबेग ने प्रभु जगन्नाथ से दुखी मन से विनती की, कि हे प्रभु मेरे पुरी शहर पहुंचने तक आप इंतजार करें । फिर क्या था भगवान जगन्नाथ ने अपने भक्त का बात मान ली और रथ जहां खड़ा था वहीं रूक गया, लाखों भक्त भगवान के रथ को आगे ले जाने के लिए कोशिश करने लगे लेकिन भक्तों की सभी कोशिशों के बाद भी रथ आगे जा ही नहीं रहा था ।

जैसे ही मुस्लिम भक्त सालबेग ने पुरी शहर पहुंचकर भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन किए, और श्री भगवान का आगे जाने लगा जगन्नाथ जी की इस कृपा से प्रसन्न होकर भक्त सालबेग पूरी शहर में ही रहने लगा । सालबेग के देहांत के बाद उनकी समाधि पुरी में उनके घर में ही बनाई गई जहां पर वह रहते थे, आज भी इस समाधि के रास्ते में प्रभु जगन्नाथ रथ सालों से जाता है और कुछ समय के लिए मुस्लिम भक्त की समाधी पर रूक जाता है ।


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