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मां कालरात्रि की पूजा करने वाले को शत्रु नहीं पहुंचा पाएंगे नुकसान, ये हैं पॉवरफुल मंत्र और पूजा विधि

मां दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि हैं, यह बहुत विकराल रूप वाली, लेकिन बहुत दयालु हैं। भक्त इनको काली, चंडी आदि नामों से भी पुकारते हैं। नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। जिन भक्तों पर इनकी कृपा हो, कोई दुश्मन उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। यहां जानते हैं मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के मंत्र और पूजा विधि..

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Pravin Pandey

Oct 20, 2023

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नवरात्रि के सातवें दिन कालरात्रि की पूजा

ऐसे लोगों को जरूर करना चाहिए कालरात्रि की पूजा
ऐसे लोग जिन्हें तंत्र मंत्र से कोई नुकसान पहुंचाना चाहता है, उसको नुकसान पहुंचाने के लिए जादू टोना या कोई टोटका किया गया है। किसी कृत्या प्रहार से वह परेशान है। वे लोग माता कालरात्रि को प्रसन्न कर परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं। दुर्गा जी की इस सातवीं शक्ति को महायोगिनी, महायोगीश्वरी भी कहा जाता है। मान्यता है माता काली सभी रोगों से छुटकारा दिलाने वाली, शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली, मन-मस्तिष्क के विकारों को दूर करने वाली हैं। इसलिए नवरात्रि के सातवें दिन मां काली को गुड़ का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में खाना चाहिए।

मां कालरात्रि की पूजा विधि
1. नवरात्रि की सप्तमी तिथि को सुबह स्ना ध्यान से निवृत्त होकर मां कालरात्रि को रोली, अक्षत चढ़ाएं।
2. इसके साथ ही माता को रातरानी के फूल चढ़ाएं, इनके सामने दीप, धूप जलाएं।
3. फिर माता को गुड़ का भोग लगाएं और उनकी आरती करें।
4. इसके साथ ही लाल कंबल के आसन पर लाल चंदन की माला से मां कालरात्रि के मंत्र पढ़ें, दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
5. लाला चंदन की माला न हो तो रूद्राक्ष की माला से जाप कर सकते हैं।

मां कालरात्रि की पूजा का मंत्र
1. ॐ कालरात्र्यै नम:।

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उपासना मंत्र
2. एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

3. ॐ यदि चापि वरो देयस्त्वयास्माकं महेश्वरि।।
संस्मृता संस्मृता त्वं नो हिंसेथाः परमाऽऽपदः ॐ।

4. हवन में घृत, गुग्गल, जायफलादि की आहुति देते समय यह मंत्र पढ़ें

'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।'

5. कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही हो, शत्रु कार्य में अड़ंगे डाल रहे हों तो इस मंत्र का जप करना चाहिए।

- ॐ ऐं यश्चमर्त्य: स्तवैरेभि: त्वां स्तोष्यत्यमलानने
तस्य वि‍त्तीर्द्धविभवै: धनदारादि समप्दाम् ऐं ॐ।

6. पंचमेवा, खीर, पुष्प, फल आदि की आहुति देते समय यह मंत्र पढ़ सकते हैं।

- 'ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ।'

7. यदि ऐसा स्वप्न आप देख रहे हैं, जिसका फल खराब हो तो इसके फल को अच्छा बनाने के लिए इस मंत्र का सुबह एक माला जप करने से बुरा फल नष्ट होकर अच्‍छा फल मिलता है।
- ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी।
एवमेव त्वथा कार्यस्मद् वैरिविनाशनम् नमो सें ऐं ॐ।।

(नोटः इससे पहले इन मंत्रों को सिद्ध करना होता है, और सिद्ध करने के लिए किसी जानकार से राय जरूर ले लें)