कोरोना वायरस: कालसर्प का बना योग, भगवान शिव का ये मंदिर दिलाता है मुक्ति

बुध गोचर में 29 मई को राहू से आगे निकल जाएगा...

भोपाल

Updated: April 05, 2020 02:59:08 pm

नवसंवत्सर 2077 के राजा बुध व मंत्री चंद्रमा हैं। इस प्रमादी नामक संवत्सर में सौम्य ग्रहों को 6 विभाग और क्रूर ग्रहों को 6 विभाग प्राप्त हुए हैं। वहीं इस नूतन वर्ष व आद्रा प्रवेश कुंडलियों में शेषनाग काल सर्प योग व जगत लग्न कुंडली में कर्कोटक नामक कालसर्प योग बना है।

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इसी के चलते कोरोना वायरस Corona virus की दहशत पूरे विश्व में फैल गई। वहीं दूसरी ओर ज्योतिष के जानकार ये भी मानते हैं कि भारत की कुंडली में बहुत दिनों से कालसर्प योग का निर्माण चल रहा है, इसलिए भारत को विपदाओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरोना वायरस COVID-19 से लड़ने के लिए जो तरह-तरह की अपील की जा रही है, अगर इन्हें ज्योतिष astrology की दृष्टि से देखा जाए तो ये राहु-केतु के उपाय किए जा रहे हैं।

जानकारों की मानें तो बुध गोचर में 29 मई को राहू से आगे निकल जाएगा, जिसके साथ ही कालसर्प योग का भी अंत हो जाएगा। वहीं 13 अप्रैल 2020 को सूर्य के उच्च राशि पर जाने के करीब 3 दिन बाद यानि 16 अप्रैल से विश्वभर के लोगों को कोरोना से राहत मिलनी शुरू हो सकती है।

देश में यहां होता है कालसर्प योग का निवारण...
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार कालसर्प दोष तब गोचर होता है जब राहु एवं केतु के मध्य बाकी के सातों ग्रह आ जाते हैं। माना जाता है राहु सर्प के सिर में और केतु पूंछ में उपस्थित होता है तो कुंडली में जब यह योग बनता है तो सभी ग्रह इन दोनों के बीच में यानी इस सांप की कुंडली में फंस जाते हैं ।

जिस कारण से जातक का भाग्य कुंडली में बंध जाता है, उसे अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है । इस योग की उपस्थित कुंडली में विशेष रूप से हानिकारक मानी जाती है।

पंडित शर्मा के अनुसार देश में मुख्य रूप से नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर में कालसर्प योग दोष पूजा होती है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर काले पत्थरों से बना हुआ एक मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है।

त्र्यंबकेश्वर , त्रिंबक शहर का एक प्राचीन हिंदू मंदिर है जो भारत के महाराष्ट्र राज्य के नासिक शहर से लगभग 32 किलोमीटर दूर है ।

यह धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से 1 ज्योतिर्लिंग माना जाता है । यह ब्रम्हगिरी पहाड़ियों की तलहटी में बसा हुआ गोदावरी नदी के तट पर स्थापित ज्योतिर्लिंग है ।

इसमें भगवान शिव महामृत्युंजय त्र्यंबकेश्वर की पूजा की जाती है। इसमें पूजा घर में परिवार के सभी सदस्य या अन्य समूहों में पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें पंडित मंत्रों का जाप करते हैं तथा जातक पूजा में विलीन होकर उन मंत्रों में खुद को समाहित करते हैं।

जातक के जीवन में कालसर्प दोष का प्रभाव उसके जीवन के 49 बरसों तक रहता है।कभी-कभी यह जीवन भर भी रहता है।दोस्तों कालसर्प योग दोष पूजा 3 घंटे का पूजन होता है जो कि विशेष तिथि पर संपन्न होता है ।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में देश विदेशों से अनेक जातक कालसर्प दोष की शांति के लिए पूजा कराने के लिए आते हैं।

नासिक त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प पूजा–
कालसर्प दोष पूजाके लिए त्र्यंबकेश्वर मंदिर में पूजन का समय 1 दिन का है जिसमें लगभग 3 घंटे का समय लगता है। इस पूजा संस्कार के लिए आवश्यक है कि जातक प्रातः 6: 00 बजे से पहले मुहूर्त के समय मंदिर में अवश्य पहुंच जाएं। यह संस्कार प्रातः 7: 30 बजे से प्रारंभ होकर प्रातः 10: 30 बजे तक संपन्न होता है। तत्पश्चात समस्त प्रक्रियाओं को पूरा कर जातक दोपहर 12: 00 बजे तक त्र्यंबकेश्वर से प्रस्थान कर सकते हैं।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में पूजन का समय
सामान्य दर्शन समय – सुबह 5: 30 से रात्रि के 9: 00 बजेतक

विशिष्ट पूजा – प्रातः 7: 00 बजे से प्रातः 9: 00 बजेतक

दोपहर की पूजा – दोपहर 1: 00 बजे से दोपहर 1: 30 तक
नासिक त्र्यंबकेश्वर कालसर्प पूजा के लिए आपको प्रातः 6: 00 बजे से पहले मंदिर आना होता है तथा गोदावरी नदी में पवित्र स्नान कर पूजा अर्चना करनी होती है ।

इस पूजा में कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना होता है जो इस प्रकार हैं...

- इस पूजा के लिए पहले अपने से योजना अवश्य बना लें ।
- इस पूजा में पहले सिर से पैर तक नहाना होता है ।
- पुरुष जातक एक अंडरवियर,एक बनियान, एक कुर्ता और एक धोती अपने पास अवश्य रखें, जो सभी नए हों।
- महिला जातक एक साड़ी, एक ब्लाउज, एक पेटिकोट और एक रुमाल अपने पास अवश्य रखें ।
- यह नए कपड़े होने चाहिए तथा काले या हरे रंग के नहीं होने चाहिए ।
- पूजा समाप्त होने के बाद कपड़े त्र्यंबकेश्वर में ही छोड़ कर जाना चाहिए, आप उन्हें घर पर नहीं ले जा सकते ।


मान्यता: नासिक त्र्यंबकेश्वर कालसर्प पूजा के लाभ...
: यह पूजा अथवा अनुष्‍ठान कराने से आपके महत्वपूर्ण कार्य संपन्‍न होते हैं ।
: इस पूजा के प्रभाव से आपके जितने भी रुके हुए काम हैं वो पूरे हो जाते हैं ।
: शारीरिक और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं ।
: इस पूजा के प्रभाव से नौकरी, करियर और जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती है ।

: अनुष्‍ठान कराने से जीवन खुशहाल एवं समृद्ध बनता है ।
: इस पूजा के प्रभाव से सुखद वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है ।
: व्यावसायिक जीवन व पद में उन्नति प्रदान होती है ।
: संतान प्राप्ति होती है संतति को होने वाले विकार दूर हो जाते हैं।
: समय-समय पर लगने वाली चोटों से राहत प्राप्त होती है , दुर्घटना या अकाल मृत्यु का संभावना कम हो जाती है।
: यहां पर कालसर्प योग की शांति करने वाले जातक को अपने जीवन में अपार सफलताएं प्राप्त होती हैं, उनकी कुंडली में राहु लाभकारी स्थिति में हो जाता है।
: पूजा करने के पश्चात जातक एकाग्र चित्त होकर के अपना कार्य एवं व्यवसाय करते हैं।
: कालसर्प योग वाले जातक साहसी एवं जोखिम उठाने वाले होते हैं जिस कारण से उन्हें अपार सफलता प्राप्त होती है।
: कालसर्प योग की शांति करने के पश्चात जातक की कुंडली में यदि राहु अच्छी स्थिति में हो तो जातक की कल्पना शक्ति बहुत अच्छी हो जाती है एवं जीवन में शांति आ जाती है।

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