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विवाह में आ रही हो बाधा तो, करें मां मंगला गौरी की आराधना

विवाह में आ रही हो बाधा तो, करें मां मंगला गौरी की आराधना

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Shyam Kishor

Aug 06, 2018

mangla gauri vrat

विवाह में आ रही हो बाधा तो, करें मां मंगला गौरी की आराधना

सावन मास के मंगलवार को मां मंगला गौरी की आराधना की जाती हैं, कहा जाता हैं कि अगर किसी के विवाह में देरी हो रही हो या कोई बाधाएं आ रही हो तो सावन मास के मंगलवार के दिन मां मंगला गौरी का व्रत रखने, उनकी विशेष विधि से पूजा उपासना करने से विवाह में आ रही बाधा शीघ्र ही दूर हो जाती है ।

अविवाहितों के लिए व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया हैं, अगर कंवारे लड़के - लड़कियां इस दिन माता मंगला गौरी यानी पार्वती की पूजा आराधना विधि विधान से करने के बाद मां मंगला गौरी की कथा का पाठ या श्रवण आवश्यक रूप से करना चाहिए । सावन में मंगलवार को आने वाले सभी व्रत-उपवास मनुष्य के सुख-सौभाग्य में वृद्धि करने वाले होते हैं, इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति व संतान की लंबी उम्र एवं सुखी जीवन की कामना के लिए खासतौर पर इस व्रत को करती हैं ।

अगर किसी अविवाहितों की कुंडली में विवाह के योग नहीं बन रहे हो तो उनके लिए मंगला गौरी व्रत विशेष रूप से फलदाई माना गया हैं । अत: अविवाहित लड़के एवं लड़कियों को सावन मास में मां मंगला गौरी व्रत के साथ-साथ सोलह सोमवारों के के व्रत भी रखना चाहिए ।

मंगल गौरी व्रत करने की विधि

- इस व्रत के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें ।

- नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ-सुथरे धुले हुए या नये वस्त्र पहनकर व्रत करना चाहिए ।

- इस व्रत में एक ही समय अन्न ग्रहण करके पूरे दिन मां पार्वती की आराधना की जाती है ।

- मां मंगला गौरी (पार्वतीजी) का एक चित्र अथवा प्रतिमा के सामने हाथ में थोड़ा सा जल व अक्षत लेकर अपनी मनोकामना रखते हुए संकल्प लें ।

संकल्प लेने के बाद में मंगला गौरी के सामने आटे का बड़ा दीपक बनाकर उसमें गाय के घी डालकर रूई की 16 बत्तियां लगाकर जलाएं । 16 बत्तियों वाला दीपक जलाकर नीचे दिये गये मंत्र का उच्चारण करते हुए मां मंगला गौरी का षोडशोपचार पूजन करें ।


पूजन के बाद ये वस्तुएं- 16 मालाएं, लौंग, सुपारी, इलायची, फल, पान, लड्डू, सुहाग की सामग्री, 16 चूड़ियां, मिठाई, 5 प्रकार के सूखे मेवे, 7 प्रकार के अनाज (जिसमें गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर) आदि थोड़े थोड़े मां मंगला गौरी को चढ़ाएं । कहा जाता हैं कि इस विधि से पूजा करने पर मां शिवप्रिया पार्वती प्रसन्न होकर अविवाहितों को शीघ्र विवाह का वरदान देती हैं ।