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देखें इस नवरात्र में बन रहे हैं पांच खास मुहूर्त..बस एक क्लिक पर

शैलपुत्री माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल व बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है। ये अपने वाहन वृषभ पर विराजमान है। 

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Manish Gite

Oct 13, 2015

Navratra kalas poojan muhurta time

Navratra kalas poojan muhurta time

नवरात्र शुरू, आज शैलपुत्री का होगा पूजन
नवरात्र में प्रतिपदा तिथि की बढ़ोतरी से नवरात्र दस दिन के होंगे। नवरात्र में वृद्धि आमजन के लिए सुख व समृद्धि, सौभाग्य कारक होगी। नवरात्र के पहले दिन मंगलवार को दुर्गा मां के प्रथम स्वरूप 'शैलपुत्री' की पूजा की जाएगी। नवदुर्गा में प्रथम दुर्गा शैलपुत्री ही है। पर्वतराज हिमालय के वहां पुत्री के रुप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा।


शैलपुत्री माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल व बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है। ये अपने वाहन वृषभ पर विराजमान है। ज्योतिषाचार्य पं. चंद्रमोहन दाधीच के अनुसार घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11.51 से 12.37 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि मंगलवार को पूरे दिन चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग रहेगा। इस कारण घट स्थापना अभिजीत मुहूर्त में ही करना फलदायी होगा।


घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
लग्न मुहूर्त
सुबह 8:48 से 11:04 बजे
तक वृश्चिक लग्न
दोपहर 11:48 से 12:12 तक अभिजीत मुहूर्त
शाम 7:41 से 9:39 तक वृषभ लग्न
चौघडि़या मुहूर्त
सुबह 10:30 से 12 तक-लाभ
दोपहर 12:00 से 1:30- अमृत
अपरान्ह 3 से 4:30- शुभ
शाम 7:30 से 9 तक-लाभ
रात्रि 10:30 से 12 तक-शुभ


ऐसे करें माता की पूजा
माता शैलपुत्री: नवरात्र के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां दुर्गा अपने प्रथम स्वरूप में शैलपुत्री के रूप में जानी जाती हैं। पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने से भगवती को शैलपुत्री कहा गया. भगवती का वाहन वृषभ है, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है। इस स्वरूप का पूजन प्रथम दिन किया जाता है। किसी एकांत स्थान पर मृत्तिका से वेदी बनाकर उसमें जौ, गेहूं बोएं और उस पर कलश स्थापित करें। कलश पर मूर्ति स्थापित करें। कलश के पीछे स्वास्तिक और उसके युग्म पा‌र्श्व में त्रिशूल बनाएं। माता शैलपुत्री के पूजन से मूलाधार चक्र जागृत होता है, जिससे अनेक प्रकार की उपलब्धियां प्राप्त होती हैं।


ध्यान मंत्र
वंदे वांच्छितलाभायाचंद्रार्धकृतशेखराम्.
वृषारूढांशूलधरांशैलपुत्रीयशस्विनीम्॥
पूणेंदुनिभांगौरी मूलाधार स्थितांप्रथम दुर्गा त्रिनेत्रा.
पटांबरपरिधानांरत्नकिरीटांनानालंकारभूषिता॥
प्रफुल्ल वदनांपल्लवाधरांकांतकपोलांतुंग कुचाम्.
कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखीक्षीणमध्यांनितंबनीम्॥

यह हैं पांच शुभ मुहूर्त
शुक्रवार कोः
विनायकी चतुर्दशी और सुबह 8 बजे से रात 1.30 तक सर्वार्थ सिद्धि योग।

शनिवार कोः
ललिता उपांग पूजा और अनुराधा नक्षत्र योग।

रविवार कोः
तुला संक्रांति, सुबह 10.24 से रात 2.30 तक सर्वार्थ सिद्धि योग।

बुधवार कोः
दुर्गाअष्टमी पूजा, त्रिपुष्कर योग, दोपहर 12.30 से श्रवण नक्षत्र योग।

गुरुवार कोः
नवमी युक्त दशमी तिथि, विजयादशमी व श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र योग।

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