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शुभ-मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मानी जाने वाली आखातीज इस बार सावों की धूम और बाजार में बूम नहीं बल्कि सुस्ती और मायूसी लाई है। पिछले पचास साल में यह पहला मौका है, जब अक्षय तृतीया (9 मई) पर शादियां बहुत कम होंगी। शुक्र अस्त होने के कारण यह स्थिति बनी है। ढाई माह बाद शुक्र 10 जुलाई को उदय होगा।
सिर्फ 13 जुलाई का है सावा
एकमात्र सावा 13 जुलाई को भड़ल्या नवमी का होगा, जिसके बाद 15 जुलाई को देव शयन कर जाएंगे। ऐसे में फिर चार माह के लिए मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। यानी, भड़ल्या नवमी इस बार सर्वाधिक रौनक लाएगी। शुक्र तीन मई को 70 दिन के लिए अस्त हो गया। इस कारण विवाह ही नहीं बल्कि नींव का मुहूर्त, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन, देव प्रतिष्ठा जैसे अन्य मांगलिक कार्य भी बंद रहेंगे। स्वयंसिद्ध अबूझ मुहूर्त भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। इसके बाद वर्ष 2040 में आखातीज पर शुक्र अस्त रहेगा।
शास्त्रों के अनुसार मांगलिक कार्यों के लिए बृहस्पति व शुक्र का उदय होना अति आवश्यक है। इनके अस्त होने पर शुभ कार्य करना निर्बल साबित होता है। इसके मद्देनजर लोग तारा अस्त होने पर अबूझ मुहूर्त भी टाल रहे हैं। बहुत कम लोग इस दौरान शादी व अन्य मांगलिक कार्य करेंगे। इधर, भड़ल्या नवमी पर 13 जुलाई को जयपुर शहर में लगभग 1500 शादियां होंगी। इसके लिए ढाई माह पहले ही 60 फीसदी मैरिज गार्डन बुक हो चुके हैं। भड़ल्या नवमी से कुछ दिन पहले बाजार में एकाएक तेजी आएगी।
Published on:
05 May 2016 09:30 am
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