15 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मृत व्यक्ति को जिंदा करने का ये अनोखा मंत्र आप जानते हैं क्या

Garuda Purana: गरुड़ पुराण में मौत का रहस्य के अलावा जीवन का रहस्य भी छीपा है।

2 min read
Google source verification
garuda_purana.jpg

गरुड़ पुराण के बारे में आप तो जानते ही होंगे। यह पुराण हिन्दू धर्म का एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें स्वर्ग-नरक, पाप-पुण्य के अलवा और भी बहुत कुछ बताया गया है। गरुड़ पुराण में मौत का रहस्य के अलावा जीवन का रहस्य भी छीपा है। अगर आप इस पुराण को पढ़ेंगे तो इसमे संजीवनी विद्या के बारे में भी बताया गया है।

अब आप सोचेंगे कि संजीवनी विद्या क्या है। दरअसल, संजीवनी विद्या वह है जिसके दम पर मृत व्यक्ति को भी जिंदा किया जा सकता है। धार्मिक ग्रंथों की माने तो यह विद्या गुरु शुक्राचार्य के पास थी, जिसके बाल पर उन्होंने कई राक्षसों को फिर से जिंदा किया था।

संजीवनी विद्या के अलावा शुक्राचार्य के पास दिव्य महामृत्युंजय मंत्र भी था, जिसके दम पर वे युद्ध में घायल सौनिकों को स्वस्थ कर देते थे और मृत सैनिकों को तुरंत पुनर्जीवित भी कर देते थे।

जब आप गरुड़ पुराण पढ़ेंगे तो आपको ऐसे-ऐसे मंत्रों के बारे में जानकारी मिलेगी, जिसके दम पर मृत व्यक्ति भी जीवित हो सकता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर इन मंत्रों को आप सिद्ध कर लेते हैं और इन मंत्रों को मृत व्यक्ति के कान में कहते हैं तो वह तुरंत खड़ा हो जाएगा।

संजीवनी मंत्र- यक्षि ओम उं स्वाहा

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को शरीर मिल जाता है लेकिन यह निर्भर करता है उसके कर्मों पर। गरुड़ पुराण के अनुसार, कभी-कभी आत्मा को देर से भी शरीर मिलता है। यही कारण है कि मृत्यु के बाद पिंडदान किया जाता है ताकि आत्मा को भटकना ना पड़े और उसे तुरंत मुक्ति मिल जाए।

महामृत्युंजय मंत्र भी असरकारक

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति महामृत्युंजय मंत्र को सिद्ध किया हुआ है तो वह मृत्यु को टाल सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि मार्कंडय ने महामृत्युंजय मंत्र के दम पर ही अपनी मृत्यु को टाल दिया था। इसके अलावा रावण ने भी महामृत्युंजय मंत्र के दम पर ही 10 बार अपने नौ सिर काट कर भगवान शिव को अर्पित कर दिया था।

महामृत्युंजय मंत्र

ऊँ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।।