इन मंत्रों से होंगे भगवान शिव के दर्शन, हर इच्छा होगी पूरी

तंत्र में कुछ उपाय ऐसे बताए गए हैं जिन्हें करना न केवल अत्यन्त सरल है वरन जो कम से कम समय में भी महादेव को प्रसन्न करने की क्षमता रखते हैं।

By: सुनील शर्मा

Published: 07 Feb 2021, 06:45 PM IST

देवों के देव भोले भंडारी भगवान आशुतोष केवल मात्र पानी का लोटा चढ़ाने से ही प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान दे देते हैं। यदि किसी विशेष कामना को लेकर उनकी आराधना की जाए तो दुनिया में ऐसा कोई कार्य नहीं जो असंभव हो, ऐसा कोई दुर्भाग्य नहीं जो सौभाग्य में न बदल सकें। जरूरत है तो केवल सच्ची श्रद्धा और लगन से उनको मानने और मनाने की।

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यूं तो शिव के पंचाक्षरी मंत्र "ॐ नम: शिवाय" का जप करके भी भगवान भोले भंडारी को प्रसन्न किया जा सकता है परन्तु इसमें समय अधिक लगता है। शास्त्रों के अनुसार "ॐ नम: शिवाय" मंत्र का पांच लाख बार जप करने से भगवान शंकर के साक्षात दर्शन होते हैं और मनचाहा वरदान प्राप्त किया जा सकता है फिर भी तंत्र में कुछ उपाय ऐसे बताए गए हैं जिन्हें करना न केवल अत्यन्त सरल है वरन जो कम से कम समय में भी महादेव को प्रसन्न करने की क्षमता रखते हैं।

इन्हीं में एक उपाय है लघु महामृत्युंजय मंत्र का। महामृत्युंजय मंत्र का ही संक्षिप्त रुप लघु महामृत्युंजय मंत्र है परन्तु यह शक्ति तथा प्रभाव में किसी भी तरह से मूल मंत्र से कम नहीं है। केवल तीन अक्षर वाले लघु महामृत्युंजय मंत्र "ॐ जूं स:" के जप से बड़ी से बड़ी बीमारी से भी मुक्ति पाई जा सकती है। इसका प्रयोग रात 9 बजे बाद किया जाता है।

यदि घर में कोई बीमार हो तो उसके निमित्त रात 9 बजे बाद दूध मिश्रित जल से शिव का अभिषेक करते हुए लघु महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। रोगी की स्थिति के अनुसार यह प्रयोग 7 दिन से लेकर 41 दिन तक का हो सकता है।

दूसरा उपाय है किसी शिव मंदिर में बैठ कर "राम" नाम का मंत्र जपने का। रामायण में कहा गया है कि शिव को पूरे विश्व में यदि कुछ सबसे ज्यादा पसंद है तो वो है राम का नाम। यही कारण है कि शिव मंदिर में बैठ कर राम नाप जप करने वाले लोगों को शिव की कृपा शीघ्र ही प्राप्त होती है।

तीसरा उपाय है भगवान भैरव की उपासना करना। कलियुग में भगवान भैरव को जीवन्त देवता माना गया है। किसी श्मशान में बने मन्दिर में पूजा करने से भी भगवान भैरव शीघ्रातिशीघ्र प्रसन्न होकर समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं।

सुनील शर्मा
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