3 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस काम से प्रसन्न होकर बाबा साई नाथ मनोकामना ही पूरी नहीं करते, साक्षात दर्शन भी देते हैं

मनोकामना ही पूरी नहीं करते बल्कि साक्षात दर्शन भी देते हैं भगवान साई नाथ

2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Shyam Kishor

Mar 06, 2019

sai baba

इस काम से प्रसन्न होकर बाबा साई नाथ मनोकामना ही पूरी नहीं करते, साक्षात दर्शन भी देते हैं

गुरुवार के दिन श्री साई बाबा के मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रहती, सब अपनी अपनी मनोकामना पूर्ति की चाह से बाबा के दरबार में जाते है, और साई नाथ भी दोनों हाथों से कृपा भी बरसाते रहते हैं । कहा जाता हैं कि गुरुवार के दिन पूजा से प्रसन्न होकर बाबा मनोकामना ही पूरी नहीं करते बल्कि अपने प्रिय सुपात्र भक्तों को साक्षात दर्शन भी देते हैं । साई नाथ की कृपा पाने के लिए ये काम जरूर करें ।

गुरूवार का दिन साईं बाबा की पूजा के लिए विशेष और उत्तम दिन माना जाता है इस दिन कोई भी साईं बाबा की पूजा करके अपने दुखों को मिटा सकता है हर किसी पर इस दिन साईं बाबा की कृपा होती ही हैं ।

तेरे दर पे आया हूँ दीदार देना । मेरे साई बाबा मुझे प्यार देना ॥
मन की चंचलता को तू दूर करना । विषय भोग की तृष्णा को शांत करना ॥
चरणों में आश्रय और आधार देना । मेरा सविनय प्रणाम स्वीकार करना ।
भूल-चूक क्षमा करके उपकार करना ॥ अंतस को भक्ति का अलंकार देना ।

गुरुवार के दिन ये काम जरूर करे शायद प्रसन्न होकर बाबा साई नाथ आपको भी साक्षात दर्शन दे सकते हैं ।


1- इस दिन उपवास रखकर अपने घर पर ही या फिर साईं बाबा के मंदिर में जाकर बाबा को पीला वस्त्र का दुपट्टा उड़ाकर माथे पर चंदन का तिलक लगाकर पीले फूलों की ऐसी माला जो 24 फूलों से मिलकर बनी हो ।


2- गुरुवार के दिन किसी ऐसे गरीब को सच में गरीब हो उसे भोजन कराकर उसे 21 बार साई नाथ की जय बोलने को कहे । इससे बाबा साई शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं ।


3- गुरुवार के दिन प्रयास करें की गलती से भी कोई गलत कार्य न करें और ना ही झूट बोले ।


4- गुरूवार के दिन शाम के समय साई बाबा के नाम से अपने घर के दरवाजे पर एवं साई मंदिर में घी के 2 दीपक जलाएं ।


उक्त उपायों को श्रद्धा औऱ विश्वास के साथ करने से श्री भगवान साई नाथ की कृपा सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और जल्दी ही किसी न किसी रूप में वे साक्षात दर्शन भी देते हैं ।