
शनैश्चर जयंती पर करें ये सरल उपाय
प्राचीन कथाओं के अनुसार शनिदेव, सूर्यदेव और छाया देवी के पुत्र हैं। इन्हें कर्मफलदाता और दंडाधिकारी माना जाता है। एक किंवदंती के अनुसार बचपन में शनिदेव की दृष्टि पड़ने से उनके पिता सूर्यदेव को अत्यधिक कष्ट हुआ था। इससे शनि देव को दंड देने वाला ग्रह माना जाने लगा। वहीं एक अन्य आख्यान के अनुसार शनि के प्रकोप से राज्य को अकाल से बचाने के लिए राजा दशरथ उनसे मुकाबला करने पहुंचे तो उनका पुरुषार्थ देख कर शनिदेव ने उनसे वरदान मांगने के लिए कहा, इस पर राजा दशरथ ने विधिवत स्तुति कर शनि देव को प्रसन्न किया।
वहीं एक बार ऋषि अगस्त की प्रार्थना पर शनि देव ने राक्षसों से उनको मुक्ति दिलाई थी। इससे इनको शुभ फल देने वाला भी माना जाने लगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि देव सभी को निष्पक्ष फल देते हैं। अच्छे कर्मों का फल सुख-समृद्धि के रूप में देते है, जबकि बुरे कर्मों का बुरा परिणाम देते हैं। इस दिन विशेष पूजा-अनुष्ठान करके शनिदेव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह का हमारे जीवन पर गहरा असर पड़ता है। मान्यता है कि शनि और राहु के बीच शत्रुता होती है। इसलिए राहु के प्रभाव के दौरान शनि देव की कृपा प्राप्त करना विशेष रूप से लाभदायक होता है। वहीं शनि और बुध के संबंध तटस्थ माने जाते हैं। यदि बुध शुभ स्थिति में हो तो शनि का प्रभाव भी सकारात्मक रहता है। हालांकि मंगल के साथ शनि का युद्ध योग जीवन में कुछ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां ला सकता है। वहीं शनि की साढ़े साती के प्रभाव से जीवन में कष्ट, रूकावट देते हैं। इस दौरान शनि देव को प्रसन्न करने से साढ़ेसाती के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
Updated on:
26 May 2024 11:55 am
Published on:
25 May 2024 10:02 pm
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