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इस विधि से यह आरती करने पर प्रसन्न हो जाते हैं भगवान आशुतोष

इस विधि से यह आरती करने पर प्रसन्न हो जाते हैं भगवान आशुतोष

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Shyam Kishor

Aug 06, 2018

shiv ji ki aarti

इस विधि से यह आरती करने पर प्रसन्न हो जाते हैं भगवान आशुतोष

सावन का पवित्र माह चल रहा है और श्रद्धालु भगवान आशुतोष की कृपा पाने के लिए तरह तरह से पूजा उपासना करते हैं, हिंदू धर्म में पूजा पाठ के बाद देवी या देवता की आरती करने का बहुत महत्व माना गया है, आरती में ढ़ोल नगाड़े, घंटी, मंजिरे हाथों से बजने वाली ताली, एक स्वर के अलावा सबसे महत्वपूर्ण होती श्रद्धा के साथ जिसकी आरती गा रहें हैं उनका ध्यान आज्ञाचक्र में करते हुए एकाग्रता के साथ करने से ईश्वर प्रसन्न हो जाते हैं । ऐसी मान्यता हैं की भगवान शिव की आरती करते समय आरती डूब जाने से आशुतोष महादेव कृपा करते हैं ।

शिवजी की आरती


जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा


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