जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को जरूर चढ़ाएं ये चीजें, जानें श्री कृष्ण की पूजा विधि

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार...

By: दीपेश तिवारी

Published: 11 Aug 2020, 12:43 PM IST

कृष्णजन्माष्टमी, जिसे जन्माष्टमी के रूप में भी जाना जाता है। वार्षिक हिंदू त्योहार जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्म के रूप में मनाया जाता है। यह जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। श्री कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जातें है। जन्माष्टमी पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और भगवान श्री कृष्ण की पूजा भी करते हैं।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस दिन कुछ खास उपाय करके भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त की जा सकती है। ये उपाय इस प्रकार हैं-

: जन्माष्टमी के दिन पूजा में परिजात के फूल अवश्य शामिल करने चाहिए। भगवान कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार हैं और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को परिजात के फुल बहुत प्रिय हैं।

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: भगवान कृष्ण को जन्माष्टमी के दिन चांदी की बांसुरी अर्पित करनी चाहिए। पूजा के बाद इस बांसुरी को अपने पैसे रखने के स्थान पर रखना चाहिए।

: जन्माष्टमी के दिन कृष्ण जी को मोरपंख जरूर अर्पित करना चाहिए। भगवान कृष्ण को मोरपंख बेहद प्रिय हैं, भगवान कृष्ण सदा अपने सिर पर मोरपंख धारण किए रहते हैं।

: जन्माष्टमी को भगवान कृष्ण और उनके भ्राता श्री बलराम जी को राखी बांधनी चाहिए।

: जन्माष्टमी के मौके पर शंख में दूध लेकर भगवान श्रीकृष्ण के बालस्वरूप का अभिषेक करना चाहिए।

: माना जाता है कि जन्माष्टमी को घर में गाय और बछड़े की छोटी सी प्रतिमा लेकर आने से पैसों से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

श्री कृष्ण पूजा विधि...
मान्यताओं के अनुसार, कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के आठवें दिन आधी रात को मथुरा में हुआ था। यह दिन हिंदुओं में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

भक्त जन्माष्टमी पर व्रत भी रखते हैं,ऐसे में जानकारों के अनुसार इसके कुछ नियम भी हैं। इनके अनुसार जन्माष्टमी से एक दिन पहले भक्तों को केवल एक समय भोजन करना चाहिए।

यह व्रत पूरे दिन रहता है और अगले दिन ही तोड़ा जाता है जब रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि दोनों समाप्त हो जाते हैं। कृष्ण पूजा करने का समय निश्चित काल में ही किया जाना चाहिए। जो वैदिक समय के अनुसार मध्यरात्रि है।

भक्त आधी रात के समय पूजा-पाठ भी करते हैं और इसमें सभी सोलह चरण शामिल होते हैं जो षोडशोपचार पूजा विधान का हिस्सा हैं। कृष्ण जन्म के मध्यरात्रि का समय आने पर , उनकी छवि में मूर्तियों को धोया जाता है, नए कपड़े पहनाए जाते हैं और उन्हें पालने में रखा जाता है। पूर्व में महिलाएं अपने घर के दरवाजों और रसोई के बाहर छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाती थीं, जो कृष्ण को उनके घरों में घूमते हुए दर्शाती थीं।

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दीपेश तिवारी
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