
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची गणेश आरती
Sukhakarta Dukhharta Varta Vighnachi: प्रसिद्ध गणेश आरती सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची की रचना स्वामी रामदास ने की थी। उन्होंने मोरगांव में भगवान मोरेश्वर की मूर्ति देखकर इस आरती की रचना की थी। इस फेमस गणेश आरती में 7 पद हैं, आइये आपको बताते हैं सभी पदों के अर्थ...
सुखकर्ता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव
अर्थः सुख देने वाले, भक्तों के दुखों को दूरने वाले, प्रेम प्रदान करने वाले, जिन भगवान गणेश के सभी अंग सुंदर हैं, सिंदूरी रंग वाले हैं और माथे पर चंदन की टीका है और कंठ में मोती की माला धारण किए हुए हैं, जिनके दर्शन मात्र से हर मनोकामना पूरी हो जाती है, ऐसे कल्याणकारी भगवान गणेश की जय हो।
रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जड़ित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव
अर्थः हे गौरी नंदन, रत्न आपकी शोभा बढ़ाते हैं। आपके शरीर पर चंदन का लेप और माथे पर कुमकुम तिलक, शीश पर हीरा जड़ा मुकुट आपकी शोभा बढ़ाता है। आपके पैरों की पायल से निकलती रूनझुन की ध्वनि अद्भुत है। हे मंगलमूर्ति आपकी जय हो।
लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव
अर्थः लंबे उदर (लंबे पेट) वाले और पीतांबर धारी (पीले वस्त्र पहनने वाले) गणेशजी, जिनके चेहरे पर विनम्रता का भाव है, जिनकी तीन आंखें हैं और सूंड वक्र है, मैं आपकी वंदना करता हूं। सभी देवताओं की ओर से पूजित और संकट में मनुष्य हों या देवता सभी की रक्षा करने वाले विनायक की रामदास प्रतीक्षा कर रहा है।
शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
अर्थः गौरी शंकर पुत्र गजमुख अपने माथे पर सिंदूर लगाते हैं, ये लाल वस्त्र धारण करते हैं, हाथ में मीठे लड्डू है, इनकी महिमा का बखान देवताओं के लिए भी संभव नहीं है। हे गणेशजी आपकी वंदना करते हुए मैं प्रणाम करता हूं। हे प्रभु आपकी जय हो, हे गणराज विद्या सुख प्रदान करने वाले, हे प्रभु मेरा मन आपमें ही लगा रहता है। हे प्रभु आप धन्य हैं, आपकी जय हो।
अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
अर्थः आठों सिद्धियां आपकी सेवा करती हैं, आप सभी संकट दूर करने वाले हैं, बाधाओं का नाश करने वाले हैं, शुभता के प्रतीक हैं, आपकी छवि में करोड़ों सूर्य का प्रकाश समाया हुआ है। माथे पर अर्धचंद्र चमकता है। हे गणों के स्वामी, विद्या प्रदान करने वाले गणराज मेरा मन आपमें लगा रहे, आपकी जय हो।
भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
अर्थः जो कोई भी भक्त अच्छी भावना से श्रद्धा पूर्वक आपकी शरण में आता है, उसे संतान, धन की प्राप्ति होती है। हे गणेश महाराज, मेरा मन आपको ही भजता है, आपही मुझे अच्छे लगते हैं। आपकी महिमा ऐसी है कि भक्त आपकी नित्य स्तुति गाते हैं। हे गणराज विद्या सुख देने वाले मेरा मन आपमें ही रमता है, आपकी जय हो।
Updated on:
12 Sept 2024 07:22 pm
Published on:
12 Sept 2024 12:42 pm
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