बुधवार है श्रीगणेश का खास दिन: इस दिन ऐसे करें अपने ग्रहों के दोषों को दूर

जो उपलब्धि आपके भाग्य में ग्रहों की स्थिति से नहीं भी लिखी हो वह भी सहज ही प्राप्त हो जाती है...

By: दीपेश तिवारी

Published: 07 Oct 2020, 04:13 AM IST

प्रथम पूज्य व सनातन धर्म के आदि पंच देवों में से एक भगवान श्री गणेश को बुद्धि व रिद्धि सिद्धि का दाता माना जाता है। वहीं ज्योतिष में श्री गणेश को बुध का कारक देव माना जाता है। जिस कारण बुधवार को इनका विशेष दिन माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते ही कि ऐ ओर जहां ज्योतिष में बुध के संबंध में माना जाता है कि यह जिसके प्रभाव में होता है उसी के अनुसार फल देता है, लेकिन इस दिन के कारक देव यानि श्री गणेश ही सभी ग्रहों के दोषों को दूर करने में सक्षम हैं।

ज्योतिष के जानकार वीडी श्रीवास्तव व पंडित सुनील शर्मा के अनुसार श्री गणेश जी को ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह से संबद्ध किया जाता है। इनकी उपासना नवग्रहों की शांतिकारक व व्यक्ति के लिए सांसारिक, आध्यात्मिक दोनों तरह के लाभ देने वाली है। वहीं अथर्वशीर्ष में इन्हें सूर्य व चंद्रमा के रूप में संबोधित किया है।

भगवान श्री गणेश जी सूर्य से अधिक तेजस्वी प्रथम वंदनदेव हैं। इनकी रश्मि चंद्रमा के सदृश्य शीतल होने से व इनकी शांतिपूर्ण प्रकृति का गुण शशि द्वारा ग्रहण करके अपनी स्थापना करने से वक्रतुंड में चंद्रमा भी समाहित हैं। इसके अलावा पृथ्वी पुत्र मंगल में उत्साह का सृजन एकदंत द्वारा ही आया है। बुद्धि, विवेक के देवता होने के कारण बुध ग्रह के अधिपति तो ये हैं ही, जगत का मंगल करने, साधक को निर्विघ्नता पूर्ण कार्य स्थिति प्रदान करने, विघ्नराज होने से बृहस्पति भी इनसे तुष्ट होते हैं।

इसके साथ ही धन, पुत्र, ऐश्वर्य के स्वामी गणेश जी हैं, जबकि इन क्षेत्रों के ग्रह शुक्र हैं। यहां तक की शुक्र में शक्ति के संचालक भी आदिदेव हैं। वहीं धातुओं व न्याय के देव शनि तक हमेशा कष्ट व विघ्न से साधक की रक्षा करते हैं, इसलिए शनि ग्रह से इनका सीधा रिश्ता है।

माना जाता है कि गणेश जी के जन्म में भी दो शरीर का मिलाप (पुरुष व हाथी) हुआ है। इसी प्रकार राहु-केतु की स्थिति में भी यही स्थिति विपरीत अवस्था में है अर्थात गणपति में दो शरीर व राहु-केतु के एक शरीर के दो हिस्से हैं। इसलिए ये भी गणपति जी से संतुष्ट होते हैं। विघ्न, आलस्य, रोग निवृत्ति एवं संतान, अर्थ, विद्या, बुद्धि, विवेक, यश, प्रसिद्धि, सिद्धि की उपलब्धि के लिए चाहे वह आपके भाग्य में ग्रहों की स्थिति से नहीं भी लिखी हो तो भी श्री गणेश जी की अर्चना से सहज ही प्राप्त हो जाती है।

यहीं नहीं गणेश जी की स्तुति, पूजा, जप, पाठ से ग्रहों की शांति स्वमेव हो जाती है। किसी भी ग्रह की पीड़ा में यदि कोई उपाय नहीं सूझे अथवा कोई भी उपाय बेअसर हो तो आप गणेशजी की शरण में जाकर समस्या का हल पा सकते हैं।

भगवान गणेश खुद शुभ-लाभ और रिद्धि-सिद्धि के दाता हैं। वे भक्‍तों की बाधा, सकंट, रोग-दोष तथा दरिद्रता को दूर करते हैं। शास्‍त्रों के अनुसार माना जाता है कि श्री गणेश जी की विशेष पूजा का दिन बुधवार है। भगवान गणेश बुध ग्रह के अधिपति भी है। इस दिन विधि विधान से भगवान गणेश की पूजा से नवग्रह दोष से मुक्ति मिलती है और सभी मुश्किल और विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। भगवान गणेश के पूजन से सुख, वैभव, शांति और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।

गणेश पूजा से बुध ग्रह की शांति...
पंडित शर्मा के मुताबिक शास्‍त्रों के अनुसार भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा के लिए सबसे उपयुक्त दिन बुधवार है। मान्यताओं के अनुसार बुधवार को गणेश जी की पूजा और उपाय करने से हर समस्‍या का समाधान हो जाता है। हनुमान जी की तरह ही गणेश जी का श्रृंगार भी सिंदूर से ही किया जाता है, इससे साधक की समस्त समस्याएं दूर होती हैं। कुछ ऐसे उपाय भी हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी कई परेशानियां दूर कर सकते है। यदि इन उपायों को बुधवार के दिन किया जाए तो शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।

– बुधवार के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि कर भगवान श्री गणेश को दूर्वा की ग्यारह या इक्कीस गांठें अर्पित करें।
– किसी जरूरतमंद व्यक्ति को हरे मूंग का दान करें, हरे मूंग का संबंध बुध ग्रह से होता है, और इसके दान से बुध ग्रह के दोष शांत किए जा सकते हैं।
– यदि किसी कुंडली में बुध ग्रह अशुभ स्थिति में हो तो उसे बुधवार के दिन गणेश को सिंदूर, चंदन, यज्ञोपवीत, दूर्वा अर्पित कर मोदक, लड्डू अथवा गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए।
– बुधवार के दिन धूप व दीप से भगवान गणेश की आरती करने से भी बुध के दोष से मुक्ति मिलती है।
– बुधवार के दिन इस मंत्र का जाप करें….
मंत्र - ऊं गं गणपतये नम: ।।

राहु और केतु का दोष का निवारण...
बल बुद्धि और विवेक के देवता भगवान श्री गणेश विघ्नहर्ता है, वे धन, बुद्धि और ऐश्वर्य के भी स्वामी है। भगवान श्री गणेश का जन्म भी दो शरीर के मिलन से हुआ है। राहु-केतु की स्थिति इसके विपरीत नजर आती है, यहां एक शरीर के दो अंश है, इसीलिए भगवान गणेश की आराधना से राहु-केतु संतुष्ट होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान गणेश को चढ़ाई जाने वाली दुर्वा का संबंध राहु से माना गया है।

ज्योतिष में इसे राहु की वनस्पति के तौर पर देखा जाता है। राहु दोष की शांति के लिए श्री गणेश द्वादश नाम स्तोत्र का पाठ करना अच्छा रहता है। इन नामों के साथ दुर्वा भगवान गणेश को अर्पित करते रहें। केतु दोष शांत करने के लिए किसी जरूरतमंद को हरे मूंग का दान करें। वहीं भगवान गणेश के निर्माणाधीन मंदिर में यथासंभव दान करें। ज्योतिष में भगवान गणेश को बेहद भी शुभ और प्रभावी माना गया है, जातक कुछ सामान्य उपाय कर नव ग्रह दोष से भी मुक्ति पाई जा सकती है।

नवग्रह दोष शांति उपाय...
1. सुबह के समय गणेश जी को दूर्वा अर्पित कर घर से निकलें, इससे आपके कार्यों में आने वाल बाधा समाप्त होगी।
2. गणेश जी को दूर्वा और मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं और लक्ष्मी जी के चित्र के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाने से आर्थिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है।
3. दुकान या व्यवसाय स्थल के उद्‌घाटन के समय चांदी की एक कटोरी में धनिया डालकर उसमें चांदी के लक्ष्मी गणेश की मूर्ति रख दें, फिर इस कटोरी को पूर्व दिशा में स्थापित करें। दुकान खोलते ही इसकी पूजन करने से व्यवसाय में उन्नति होती है।
4. रोज नियम से भगवान गणेश की पूजा करें और उनके मंत्र ‘श्री गं गणपतये नमः’ का जप करें, इससे सभी प्रकार की परीक्षा में सफलता प्राप्त होगी।
5. संकष्टी चतुर्थी के व्रत करने से चंद्रमा के शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
6. गणेशजी के मंत्रों के जाप से शनि दोष से पीड़ित व्यक्ति को भी राहत मिलती है।

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