धौलपुर

शान में लगाई करोड़ों की बोली, अब लाखों की बिक्री तक नहीं

धौलपुर. जिले में आबकारी विभाग के शराब ठेके नए खिलाडिय़ों ने बड़ी बोलियां लगाकर तो ले लिए लेकिन अब ये ठेके इनके लिए ही गले की हड्डी बन गए हैं। इसकी वजह बिक्री से कई गुना अधिक की बोली लगाकर दुकान उठाना है।

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शान में लगाई करोड़ों की बोली, अब लाखों की बिक्री तक नहीं

धौलपुर. जिले में आबकारी विभाग के शराब ठेके नए खिलाडिय़ों ने बड़ी बोलियां लगाकर तो ले लिए लेकिन अब ये ठेके इनके लिए ही गले की हड्डी बन गए हैं। इसकी वजह बिक्री से कई गुना अधिक की बोली लगाकर दुकान उठाना है। अब हालत ये है कि शराब की दुकानों पर बिक्री नहीं होने से ठेकेदारों के पसीने छूट रहे हैं। उधर, आबकारी विभाग लगातार बिक्री बढ़ाने के लिए दवाब बना रहा है। ऐसे में कई ठेकेदारों की हालत खराब हो रही है।

सूत्रों के अनुसार अगर ऐसे ही स्थिति रही तो धंधे में शामिल हुए नए खिलाड़ी बीच में ही रास्ता छोडकऱ निकल सकते हैं। ऐसे में विभाग के लिए भी सिरदर्दी और बढ़ सकती है। बीच में ठेका छोड़ दिया तो राशि वसूलना मुश्किल हो जाएगा। पूर्व में ऐसा हो चुका है, जिनकी राशि अभी तक विभाग वसूल नहीं कर पाया है। अधिक समस्य प्रदेश के बाहर के ठेकेदार के साथ आती है। जिले में आबकारी विभाग की 77 दुकानें हैं। इसमें नगर परिषद क्षेत्र में 19 दुकानें हैं।

21 करोड़ की शराब उठानी, अभी तक 10 करोड़ की उठी

विभाग के अनुसार जुलाई व अगस्त माह में करीब 21 करोड़ की सभी ठेकों को शराब उठानी है। जबकि 20 अगस्त तक करीब 10 करोड़ रुपए की शराब ठेकेदार उठा पाए हैं। वहीं, सितम्बर माह शुरू होने पर 21 से बढकऱ कुल शराब का उठाव 31 करोड़ पहुंच जाएगा। अगर इस बीच शराब नहीं उठी तो कई शराब ठेकेदारों की अंटी ढीली हो सकती है। गारंटी के तहत तय माल नहीं लेने पर विभाग की ओर से कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है। पिछले साल भी कई ठेकेदार बीच में दुकानें छोडकऱ चले गए थे। जिससे गारंटी की राशि को जप्त करने के बाद भी करोड़ों की राशि बकाया बनी हुई है। विभाग का गत वर्ष लक्ष्य 126 करोड़ था लेकिन 110 करोड़ रुपए तक ही पहुंच पाए। वहीं, इस साल आबकारी विभाग को करीब 200 करोड़ का राजस्व जुटाना है और अभी तक 54 करोड़ रुपए राजस्व एकत्र हुआ है। जबकि बीते साल 183 करोड़ के राजस्व में से 139 करोड़ रुपए ही मिल पाए थे।

जिले में कहां-कहां करोड़ों के उठी दुकानें

जिले में सरकार की शराब की कई दुकानें करोड़ों रुपए में उठी हैं। जबकि इनकी कीमत पूर्व में इतनी नहीं थी। पिछले दो साल से आपसी नाक का सवाल बनाकर बेहिसाब बोली लगाने से दाम आसमान छू गए। जिले में बसेड़ी क्षेत्र में एक दुकान करीब 3 करोड़ की लागत की है। इसी तरह सरमथुरा क्षेत्र में करीब सवा 4 करोड़ रुपए, धौलपुर नगर परिषद क्षेत्र में करीब 2.50 रुपए और बाड़ी शहरी क्षेत्र में करीब डेढ़ करोड़ रुपए की शराब की दुकानें हैं। इसमें कुछ चल रही हैं जबकि कुछ ही हालत पतली बनी हुई है। ठीक वाले की भी केवल खर्चा निकल पा रहे है।

पड़ोसी यूपी में सस्ती, एमपी में हल्की महंगी

उधर, जिले उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश से सीमा घिरा हुआ है। इसमें उत्तरप्रदेश के पड़ोसी आगरा जिले में देशी पव्वा राजस्थान से करीब 5 रुपए सस्ता है। पव्वा करीब 50 से 60 रुपए के बीच है। जो अलग-अलग ब्रांड हैं। जबकि मध्यप्रदेश में देशी पव्वा राजस्थान से कुछ महंगा है। यानी किसी पर 5 तो किसी पर 6 रुपए अधिक हैं। इस वजह से यूपी बॉर्डर वाले इलाके में सस्ती होने से ग्राहक यूपी से लेना पसंद करता है। वहीं, अंग्रेजी ब्रॉडों की कीमतों में तो 200 से 400 रुपए तक अंतर है। जिस वजह से यूपी से आने वाले स्थानीय लोग अंग्रेजी ब्रॉड आगरा इलाके से खरीद कर ले आते हैं।

- ठेकेदारों के बोली बढ़ाकर दुकानें लेने से दिक्कत आ रही है। जिस हिसाब से बोली लगी है, उस लिहाज से बिक्री नहीं हो रही है। विभाग को लक्ष्य पूर्ण करना है। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

- घनश्याम शर्मा, जिला आबकारी अधिकारी, धौलपुर

Published on:
27 Aug 2023 07:53 pm
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