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मोर्चरी में गंदगी के बीच रखे जा रहे शव, संक्रमण का खतरा

dholpur, बाड़ी सामान्य अस्पताल जिसे 3 वर्ष पूर्व जिला अस्पताल में क्रमोन्नत तो कर दिया, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों से लेकर आवश्यक सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है। चिकित्सालय में ना तो वरिष्ठ चिकित्सक, न सर्जन और ना ही फिजिशियन चिकित्सक तक के पद खाली हैं। अस्पताल परिसर से लेकर पोस्टमार्टम कक्ष तक का हाल बेहाल है। चहुंओर फैली गंदगी मरीजों की दुविधा और बढ़ा रही है।

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पीएमओ बोले- शव को कहीं भी रख लो, एक ही बात

जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान, साफ-सफाई से हाल बेहाल

तीन वर्ष पूर्व जिला अस्पताल में क्रमोन्नत के बाद भी अव्यवस्थाओं का अभाव

dholpur, बाड़ी सामान्य अस्पताल जिसे 3 वर्ष पूर्व जिला अस्पताल में क्रमोन्नत तो कर दिया, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों से लेकर आवश्यक सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है। चिकित्सालय में ना तो वरिष्ठ चिकित्सक, न सर्जन और ना ही फिजिशियन चिकित्सक तक के पद खाली हैं। अस्पताल परिसर से लेकर पोस्टमार्टम कक्ष तक का हाल बेहाल है। चहुंओर फैली गंदगी मरीजों की दुविधा और बढ़ा रही है।

जिला अस्पताल में उपखंड मुख्यालय के साथ कंचनपुर और डांग क्षेत्र की बसई डांग, सोने का गुर्जा थानों में होने वाली दुर्घटना और हादसों में मृतकों का पोस्टमार्टम अस्पताल में ही किया जाता है। लेकिन मोर्चरी में ना तो साफ -सफाई रहती है ना कोई स्वीपर झाड़ू लगाता है। ऐसे में वहां लाने वाले शवों को गंदगी के बीच जमीन पर रखकर छोड़ दिया जाता है। जिससे कीटाणु लगने के साथ-साथ संक्रमण का भी खतरा रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब कोई लावारिश शव मिलता है और उसको मोर्चरी में रखना होता है तो उसके लिए भी सुविधा शुल्क मांगा जाता है। उधर, पीएमओ का कहना है कि शव को कहीं भी लो एक ही बात है।

मोर्चरी में शव रखने पर मांगते हैं रुपए

25 अप्रेल को बसई डांग थाना क्षेत्र के निभी का ताल में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। आठ मील चौकी प्रभारी जयदेव सिंह, कांस्टेबल रामरूप, हरिओम और गाड़ी चालक पवन शव को लेकर रविवार रात अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने समाजसेवी शब्बीर बाबा को फोन किया और बताया कि गुमनाम डेड बॉडी मिली है, जिसे अस्पताल में शिनाख्ती के लिए रखवाना है। इस दौरान डेड बॉडी को रखने के लिए मोर्चरी का स्टाफ नहीं मिला। दो घंटे तक डेड बॉडी पुलिस की गाड़ी में पड़ी रही। इन हालातों से साफ पता चलता है कि अस्पताल प्रबंधन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने में कितना प्रतिबद्ध है। शब्बीर का कहना है कि इस प्रकार गुमनाम शवों को रखने की एवज में पैसा मांगा जाता है। युवा भी इसमें सहयोग करते हैं। ऐसी स्थिति रही तो कोई सहयोग के लिए आगे नहीं आएगा।

मोर्चरी में एक शव पहले से था, जिसके बाद दूसरी डेड बॉडी आई थी, इसलिए शव को जमीन पर रखना पड़ा। शव को ऊपर रख लो चाहे नीचे रख लो बात एक ही है। वहीं शव को रखे ज्यादा समय हो जाता है तो कीटाणु तो लग जाते हंै।

- डॉ.हरिकिशन मंगल, पीएमओ जिला अस्पताल