
-तपती दोपहरी में 21 जून को नौनिहालों को बुलाने पर अब उठे सवाल
धौलपुर.राज्य के शिक्षा विभाग में ग्रीष्मावकाश को लेकर दोहरा रवैया सामने आया है। जहां कॉलेज शिक्षा में छात्रों व शिक्षकों को एक मई से 30 जून तक अवकाश यानी 61 दिन की छुट्टियां देकर गर्मी में राहत दी गई है, जबकि स्कूली शिक्षा में आग उगलती दोपहरी में नौनिहालों को स्कूल बुला कर सितम किया जा रहा है। इसके अलावा उनकी छुट्टियां 17 मई से शुरू होंगी । यही नहीं इस बार शिक्षा विभाग ने शिविरा पंचांग में बदलाव कर फिर एक बार बच्चों को भीषण गर्मी में 21 जून से स्कूलों में बुलाया गया है। इस दौरान बच्चों को महज 35 दिन की छुट्टियां मिलेंगी।
राज्य में ग्रीष्मकालीन अवकाश के इन दोहरे मापदंडों एवं भीषण गर्मी के बीच 21 जून से स्कूल दोबारा खुलवा कर छात्रों को बुलाने के फैसले का विरोध प्रारंभ हो गया है। जिसको लेकर शिक्षकों एवं छात्रों में जबरदस्त आक्रोश है। शिक्षा विभाग के इस फैसलों को लेकर शिक्षकों व छात्रों में नाराजगी देखी जा रही है। जिसको लेकर लगातार मुख्यमंत्री से दोहरे नियमों में बदलाव कर छोटे-छोटे बच्चों को गर्मी से राहत मिले इसके लिए शिविरा पंचांग में बदलाव कर स्कूली शिक्षा में भी कॉलेज शिक्षा की तरह अगले सत्र से गर्मियों की छूटियां 1 मई से 30 जून तक किए जाने तथा इस बार 21 जून से स्कूल खोलने के फैसले को बदलकर पहले की भांति 1 जुलाई से शुरुआत करने की मांग कर रहे हैं। देखा जाए तो एक तरफ पारा 45 पार कर रहा है, लू के थपेड़े लोगों का हाल बेहाल कर रहे हैं और दूसरी तरफ हमारा शिक्षा विभाग तारीखों व आंकड़ों के मायाजाल में उलझा हुआ है।
इस बार सबसे कम 35 दिन की छुट्टियां
राज्य में स्कूली शिक्षा में बच्चों के लिए गर्मियों का शेड्यूल बेहद चिंताजनक व अलग है। इस बार विभाग ने स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि घटाकर मात्र 35 दिन कर दी है, जो 17 मई से 20 जून तक है। मई के पहले पखवाड़े में तापमान 40 से 45 डिग्री के बीच छात्रों को स्कूल आना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि 21 जून से स्कूल फिर शुरू हो जाएंगे, जबकि पूरे राज्य में जून का महीना भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों वाला रहता है। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। वहीं अधिकतर सरकारी स्कूलों में संसाधनों की बेहद कमी है। ऐसे में अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
शिविरा में संशोधन की मांग
भीषण गर्मी में 21 जून को स्कूल खोलने के फैसले के विरोध में राज्य भर में शिक्षक संगठनों की ओर से काफी समय से धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। शिक्षक संघों का आरोप है कि जून के अंत में जब तापमान अपने चरम पर होता है, तब छोटे बच्चों को स्कूल बुलाना उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। स्कूलों में ग्रीष्मावकाश पहले की तरह 17 मई से 30 जून तक रखा जाना चाहिए। यदि सरकार ने शिविरा पंचांग में संशोधन कर छुट्टी कटौती का फैसला वापस नहीं लिया जाता तो यह नौनिहालों के साथ अन्याय होगा।
मुख्य सवाल जो सबको चुभ रहे
- कॉलेज के छात्रों के लिए छुट्टियां 30 जून तक, तो स्कूली बच्चों को इतनी कम छुट्टियां क्यों?- कभी एडवाइजरी जारी होती है, तो कभी गेंद जिला कलक्टर के पाले में डाल दी जाती है। आखिर बच्चों की सुरक्षा पर इतनी सख्ती और हिचकिचाहट क्यों?
- क्या 20 जून की डेडलाइन बच्चों की सेहत से ज्यादा कीमती है।
- जब गर्मी अपने चरम पर है, तो छुट्टियों को 30 जून तक बढ़ाने में हर्ज क्या?भीषण गर्मी में 21 जून को स्कूल खोलने का फैसला पूरी तरीके से गलत है। इस से छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सरकार को स्कूल व कॉलेज शिक्षा में गर्मियों की छुट्टियां एक समान करनी चाहिए। साथ ही बच्चों के हित में ग्रीष्मावकाश कटौती वापस लेकर पहले की भांति एक जुलाई से स्कूल खोलने चाहिए।
-राजेश शर्मा, जिलाध्यक्ष, अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ
Published on:
05 May 2026 07:14 pm
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