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खुशखबर…वन्यजीव गणना के दौरान दिखे 30 से अधिक काले हिरण

धौलपुर. राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य धौलपुर के अंतर्गत नाका समोना क्षेत्र में हाल ही में आयोजित वन्यजीव गणना के खुशखबर सामने आई है। गणना के दौरान 30 से अधिक ब्लैकबक यानी काला हिरण देखे गए हैं। काला हिरण घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील प्रजाति है,

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काला हिरण घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण, संवेदनशील प्रजाति

धौलपुर. राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य धौलपुर के अंतर्गत नाका समोना क्षेत्र में हाल ही में आयोजित वन्यजीव गणना के खुशखबर सामने आई है। गणना के दौरान 30 से अधिक ब्लैकबक यानी काला हिरण देखे गए हैं। काला हिरण घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील प्रजाति है, जिसकी उपस्थिति क्षेत्र की स्वस्थ पारिस्थितिकी का संकेत देती है।

काला हिरण मध्यम आकार का अत्यंत आकर्षक मृग है, जिसमें स्पष्ट लैंगिक भिन्नता पाई जाती है। वयस्क नर का रंग गहरे भूरे से काले तक होता है तथा इसके सर्पिल सींग होते हैं, जबकि मादा हल्के पीले-भूरे रंग की होती है और सामान्यत: बिना सींग की होती है। यह प्रजाति मुख्यत: घासभूमि, झाड़ीदार एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है तथा खुले मैदानों को अधिक पसंद करती है। यह एक दिवाचर एवं शाकाहारी प्रजाति है, जो मुख्यत: घास एवं कोमल वनस्पतियों पर निर्भर रहती है। काला हिरण सामान्यत: समूहों में रहता है, जिनका आकार मौसम एवं भोजन की उपलब्धता के अनुसार बदलता रहता है।

ऐतिहासिक रूप से काला हिरण राजस्थान में व्यापक रूप से पाया जाता था, किन्तु वर्तमान में यह सीमित एवं खंडित आवासों में ही देखा जाता है। हालांकि, संरक्षण प्रयासों के कारण कुछ क्षेत्रों में इसकी संख्या में वृद्धि भी दर्ज की गई है। धौलपुर क्षेत्र एवं राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य में काला हिरण के अतिरिक्त नीलगाय, चीतल, सांभर, चौसिंगा एवं चिंकारा जैसे अन्य मृग भी पाए जाते हैं, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं।

वन विभाग अभयारण्य क्षेत्र में नियमित गश्त, अवैध शिकार पर नियंत्रण, आवास संरक्षण, जल स्रोतों का विकास तथा स्थानीय समुदाय के सहयोग से वन्यजीव संरक्षण के प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप काला हिरण जैसी संवेदनशील प्रजातियों की पुन: उपस्थिति एवं संरक्षण संभव हो पाया है। यह अवलोकन न केवल अभयारण्य की पारिस्थितिक गुणवत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह भी इंगित करता है कि उचित संरक्षण एवं प्रबंधन से दुर्लभ प्रजातियों की वापसी संभव है। वन विभाग भविष्य में भी ऐसे संरक्षण प्रयासों को निरंतर जारी रखेगा।

गणना अभी भी जारीवन विभाग ने वन्य जीव गणना बुद्ध पूर्णिमा के दिन की थी। इस दौरान जलाशयों के पास स्थित पेड़ों पर मचान बनाकर वन्यजीवों की गणना की गई थी। गणना के दौरान वनकर्मियों तेंदुआ, हिरण, चीतल, सांभर, चौसिंगा एवं चिंकारा, भालू आदि जानवरों की मौजूदगी मिली।