
धौलपुर. राजस्थान ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों में भी धौलपुर जिला आलू उत्पादन के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर चुका है। जिले की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल मौसम और किसानों की मेहनत ने धौलपुर को ‘आलू हब’ बना दिया है। हर साल जिले में आलू की बंपर पैदावार होती है और उत्पादन इतना अधिक होता है कि जिले में मौजूद 35 से 40 कोल्ड स्टोरेज पूरी तरह भर जाते हैं।
इसके बावजूद हैरानी की बात यह है कि धौलपुर में पैदा हुआ अधिकांश आलू जिले के बाजारों तक नहीं पहुंचता। किसानों को अपनी उपज अन्य राज्यों में भेजनी पड़ती है, जबकि स्थानीय स्तर पर आलू का उपयोग न के बराबर है।
बाहर जा रही उपज, भीतर बढ़ रही चिंता
स्थानीय किसान बताते हैं कि धौलपुर से आलू उत्तर प्रदेशए मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भेजा जाता है। वहां इसका उपयोग बड़े पैमाने पर होता है, जबकि धौलपुर में ही इसका लाभ किसानों को पूरी तरह नहीं मिल पाता। किसान विमल भार्गव ने बताया कि जिले में आलू की पैदावार लगातार बढ़ रही है, लेकिन उपयोग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। अगर यहीं आलू का इस्तेमाल हो तो किसानों की हालत बदल सकती है।
कोल्ड स्टोरेज भरे, लेकिन समाधान अधूरा
जिले में बने कोल्ड स्टोरेज किसानों के लिए राहत जरूर हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं बन पा रहे। कोल्ड स्टोरेज भर जाने के बाद किसानों के सामने आलू बाहर भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। इससे परिवहन खर्च बढ़ता है और कई बार किसानों को कम दाम पर आलू बेचना पड़ता है।
आलू आधारित उद्योग खोल सकते हैं विकास के द्वार
विशेषज्ञों और किसानों का मानना है कि यदि धौलपुर में आलू आधारित प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाएं, तो जिले की तस्वीर बदल सकती है। आलू चिप्स, फे्रंच फ्राइज, स्टार्च, पैकेज्ड फूड और बीज आलू जैसी इकाइयों की यहां अपार संभावनाएं हैं। इससे न केवल किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलेगा, बल्कि जिले के युवाओं को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा।
किसान बोले:धौलपुर में ही हो आलू का इस्तेमाल
किसानों की प्रमुख मांग है कि सरकार और प्रशासन धौलपुर में आलू के स्थानीय उपयोग को बढ़ावा दे। इसके लिए उद्योगपतियों को प्रोत्साहन, सब्सिडी और आधारभूत सुविधाएं दी जाएं, ताकि धौलपुर सिर्फ उत्पादन केंद्र ही नहीं, बल्कि आलू उद्योग का मजबूत केंद्र बन सके।
Published on:
23 Jan 2026 06:27 pm
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