
Dholpur news
धौलपुर. राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध बजरी खनन से जलीय जीवों को पहुंच रहे नुकसान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुओ मोटा याचिका पर दिए आदेशों के बाद से बीते कुछ दिनों से चंबल किनारे के घाटे सूने पड़े हैं। राजस्थान और मध्यप्रदेश सीमा में विभाजीत कर रही चंबल नदी किनारे कुछ दिन पहले अनगिनत ट्रेक्टर-ट्रॉलियां केवल अवैध बजरी ढोहने में लगे हुए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के चले आदेश और राजस्थान सरकार को लगी फटकार के बाद सरकारी मशीनरी एक्टिव हो गई।
बजरी माफिया के गतिविधियों को रोकने के लिए यहां वन विभाग ने जिले की सीमा में करीब आधा दर्जन चेक पोस्ट स्थापित किए, जहां पर चौबीस घंटे निगरानी रहेगी। उधर, पुलिस प्रशासन ने भी करीब-करीब कसरत पूरी कर ली और एक-दो दिन में बजरी निकासी के चिह्नित 27 प्वाइंटों में से प्रमुख पर अस्थाई चेक पोस्ट का तंबू लग जाएंगे। इन चेक पोस्टों पर भी हथियारबंद आरएसी जवान तैनात रहेंगे। वहीं, ड्रोन से चंबल किनारे घाटों पर आसमान से नजर रखी जा रही है। हालांकि, सीसीटीवी और लाइव फीड समेत अन्य सुरक्षा इंतजामों के लिए महकमे की ओर से मुख्यालय को सामान का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। माना जा रहा है कि इस आगामी दिनों में बजट स्वीकृत होने पर चंबल के घाटों पर निगरानी और बढ़ा दी जाएगी। वहीं, सख्ती के चलते इन दिनों चंबल बजरी के भाव आसमान छू रहे हैं। प्रति ट्रेक्टर-ट्रॉली अब 6 से 7 हजार रुपए में बिक रही है और यह भी चोरी छिपे पहुंच रही है। जबकि पहले यही बजरी आसानी से 3 से 4 हजार रुपए में उपलब्ध थी। कड़ाई का असर भवन निर्माण कार्यों पर पड़ा है और लागत बढऩे से बजट गड़बड़ाया है।
डस्ट और सिंध की रेत की डिमांड बढ़ी
उधर, चंबल बजरी पर नकेल कसने के बाद से शहर समेत जिलेभर में डस्ट और सिंध की रेत की डिमांड बढ़ी है। बिल्डिंग मटैरियल का सामान बेचने वाली फड़ों पर डस्ट का ढेर लगा हुआ है। यह काली डस्ट मध्यप्रदेश के ग्वालियर से धौलपुर पहुंच रही है। अब प्रतिदिन कई डंपर शहर में खाली हो रहे हैं। वहीं, सिंध की रेत भी शहर में आ रही है। हालांकि, अभी लोग इसको इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं। डस्ट की एक ट्रेक्टर-ट्रॉली भी करीब 3 से ऊपर की बाजार में मिल रही है। वहीं, सिंध की रेत का भाव अधिक है।
इन घाटों पर अस्थाई चेक पोस्ट स्थापित
चंबल की अवैध बजरी परिवहन पर नजर रखने के लिए वन विभाग प्रशासन की ओर से अभी तक छह अस्थाई चौकी स्थापित की हैं। इसमें दुर्गशी घाट, तिर्घरा घाट, अंडवा पुरैना घाट, डांग बसई घाट और डांगरीपुरा घाट पर अस्थाई चेक पोस्ट बनाए हैं। यहां पर बॉर्डर होम गार्ड के जवान चौबीस घंटे तैनान रहेंगे।
खनन क्षेत्र में लगे वाहनों में जुलाई तक लगाने ही जीपीएस
उधर, ट्रेक्टर-ट्रॉली, डंपर, ट्रक, लोडर, पोकलेन और जेसीबी मशीनों पर निगरानी रखने के लिए अब जीपीएस लगाने को परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई शुरू हो गई है। खनन क्षेत्र में लगे वाहनों को जीपीएस लगाना होगा। जीपीएस से इन वाहनों की मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि 31 तक जीपीएस लगाने का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। परिवहन विभाग ने बताया कि धौलपुर जिले में खनन क्षेत्र में दौड़ रहे वाहनों में जीपीएस लगाने का कार्य पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लिया है। सफल रहा तो फिर राजस्थान और देशभर में लागू होगा। वहीं, अवैध खनन रोकने और संसाधनों के लिए करीब 65.47 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।
टास्क फोर्स गठित की, वाहनों की जांच शुरू
उधर, सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई में राजस्थान सरकार ने बताया कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधि रोकने के लिए पांच जिलों में टॉक्स फोर्स गठित की है। वहीं, पुलिस, वन, खान, परिवहन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम इलाके में जांच कर रही है। जबकि धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बंूदी और कोटा जिलों में अवैध बजरी में पकड़े जाने वाले वाहनों को जुर्माना कर छोडऩे पर पहले ही रोक लगा दी है।
- जिले की सीमा में चंबल नदी से बजरी निकासी के चिह्नित घाटों में से आधा दर्जन पर चेक पोस्ट बनाए हैं। यहां पर बॉर्डर होम के जवान तैनात किए गए हैं। साथ ही चंबल किनारे के गांवों में कर्मचारी व अधिकारी जाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और कार्रवाई से अवगत करा रहे हैं। जिससे किसी तरह की विवाद की स्थिति न हो।
- डॉ.आशीष व्यास, डीएफओ (वन्यजीव)
- अवैध बजरी परिवहन और निकासी वाले रास्तों पर एक-दो दिन में अस्थाई पोस्ट लगाई जाएगी। यहां हथियारबंद आरएसी जवान तैनात किए जाएंगे। साथ ही पेट्रोलिंग पार्टी अलग से गश्त करेगी। सीसीटीवी कैमरे और अन्य संसाधन को लेकर मुख्यालय को अगवत कराया है। फिलहाल जिले में अवैध बजरी को लेकर चौकसी कड़ी कर दी है।
- विकास सांगवान, पुलिस अधीक्षक धौलपुर
Updated on:
21 May 2026, 6:45 PM IST
Published on:
21 May 2026, 6:45 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.