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डस्टर, ब्लैक बोर्ड बने पुरानी बात, सरकारी विद्यालय हुए स्मार्ट

  - शिक्षा का विभाग का नवाचार, स्मार्ट क्लास के जरिए पढ़ाई शुरू - पैन ड्राइव में सिलेबस, भूगोल व इतिहास वीडियो व चित्रों के जरिए समझा रहे - जिले के 290 स्कूलों में डिजिटल बोर्ड पर पढ़ाई

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 Duster, black board become a thing of the past, government schools become smart

डस्टर, ब्लैक बोर्ड बने पुरानी बात, सरकारी विद्यालय हुए स्मार्ट

अम्बर अग्निहोत्री

धौलपुर. सरकारी स्कूलों में अब डस्टर और ब्लैक बोर्ड के जरिए पढ़ाई अब बीते जमाने की बात हो गई है। प्रदेश में शिक्षा का स्तर सुधारने और पढ़ाई को रुचिकर बनाने के लिए नवाचार हो रहे हैं। छात्रों के भविष्य संवारने की दिशा में सरकार ने मिशन स्टार्ट के तहत नई पहल शुरू करते हुए स्मार्ट क्लास की शुरुआत की है। जिले के 290 सरकारी स्कूल में करीब 75 हजार अध्ययरत विद्यार्थियों को अब डिजिटल बोर्ड के जरिए पढ़ाया जा रहा है। जो अब निजी स्कूलों को मात देने की तैयारी में हैं। जिल में नौवीं से 12वीं तक कुल 347 विद्यालय हैं। जबकि जिले में एक से 12वीं तक के कुल 1148 विद्यालय संचालित हैं। जिसमें करीब तीन लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं।

जिले मे इन 290 विद्यालयों में ब्लैक बोर्ड की जगह डिटिजल बोर्ड पर पढ़ाया जा रहा है। इनका सिलेबस अब एक छोटी सी पेन ड्राइव में होगा। कंप्यूटर से लैस लैब और डिजिटल ब्लैक बोर्ड पर इतिहास, भूगोल और विज्ञान की पढ़ाई विद्यार्थियों में पढऩे की रुचि जगाती है। स्मार्ट क्लास में डिजिटल बोर्ड पर अब बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ भूगोल की सामग्री सब वीडियो के जरिए समझाई जा रही है। जिससे विद्यार्थी को पहाड़, नदी, पेड़, बर्फीले स्थान, झीलों आदि समझने में आसान रहती हैं।

समझाने का आसान तरीका

डिजिटल बोर्ड की कक्षा में एलसीडी स्क्रीन, हाईटेक स्पीकर, स्मार्ट बोर्ड सामान्य कक्षा नहीं बल्कि आधुनिकता का अहसास कराती है। बिजली गुल से अव्यवस्था न हो इसके लिए इन्वर्टर की भी व्यवस्था की है। स्मार्ट क्लास में भूगोल विषय के मानचित्र समझना हो या फिर भारतीय इतिहास को जनाना हो सभी चित्र और वीडियो के जरिए बताया जा रहा है।

डिजिटल बोर्ड खुलते ही स्टडी मटेरियल में स्वागत

डिजिटल एलइडी स्क्रीन में कई तरह का स्टडी मटेरियल ऑनलाइन रहता है। जिसे ओपन कर छात्र पढ़ सकते हैं। बोर्ड पर एक तरफ वीडियो दिखाने की सुविधा होती है। दूसरी ओर किताब ओपन करने की तो तीसरी और लिखने की सुविधा है। बोर्ड से छात्र-छात्रों को ऑडियो और वीडियो के माध्यम से समझाया जा सकता है।

प्राचार्य बनाएंगे समय सारणी

शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में सभी विषयों का ई-कंटेंट उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें परिस्थितियों के अनुसार हार्ड डिस्क, पैन ड्राइव के माध्यम से डिजिटल कक्षाएं संचालित करवाई जा रही है। वहीं, स्कूलों में हर दिन संचालित की जाने वाली ई क्लासेस में किस दिन, किसी पीरियड में और कौन से विषय पर ई-कंटेंट के जरिए शिक्षण होगा। इसकी समय सारणी का निर्धारण संस्था प्रधान एक सप्ताह पहले तैयार करता है।

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टॉक-

सरकारी स्कूल में पहले ब्लैक बोर्ड पर पढ़ाई होती थी। फिर व्हाइट बोर्ड आया। हालांकि सिर्फ कलर का फर्क हुआ। लेकिन अब डिजिटल बोर्ड पर पढ़ाई हो रही है। इससे पहले की तुलना में विषयों को समझने में असानी होती है।

- नीलम मंगल, छात्रा 11वीं

सरकारी स्कूल में डिजिटल बोर्ड पर पढ़ी गई चीजे आसानी से समझ में आ जाती है। इसके साथ ही लंबे समय तक याद बनी रहती है। पढ़ाई बोरियत महसूस नहीं कराती है।

- सलोनी, छात्रा 12वीं

- सरकार की अच्छी पहल है। जिले में 290 विद्यालयों में डिजिटल कक्षाएं शुरू हो गई है। शिक्षकों की कमी के बाद भी अब छात्रों की पढ़ाई में कोई रूकावट नहीं आएगी। कठिन विषय भी उनको स्मार्ट बोर्ड में पूरी तरह से समझ में आता है।

- कृष्णा कुमारी, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी धौलपुर