
- खूब बिका सत्तू और खरबूजा
- शहर में बाग भवा साहब बाडे में गंगाजी का ऐतिहासिक मंदिर
धौलपुर. गंगा दशहरा के आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 5 जून को गंगा दशहरा है। पर्व को लेकर बाजार में श्रद्धालुओं ने खरीदारी शुरू कर दी है। बाजार में शाम के समय लोग पर्व पर पूजा अर्चना को लेकर सामग्री खरीदारी करते नजर आए। साथ ही लोगों ने बाजार में जगह-जगह ठेलों पर बिक रहा सत्तू भी खरीदा। वहीं, महिलाओं ने दशहरा पर्व पर दान पुण्य की सामग्री खरीदी। बता दें कि दशहरा पर्व पर दान-पुण्य का अपना ही महत्व है। महंत कृष्णदास ने बताया कि इस दिन गंगाजी भगवान भोले शंकर की जटाओं से निकलती हैं। इस दिन मां गंगा और शिवजी की पूजा उपासना और दान-पुण्य का विशेष महत्व रहता है।
बाजार में जगह-जगह बिक रहा सत्तू
इन दिनों बाजार में सत्तू खूब बिक रहा है। अच्छी क्वालिटी का सत्तू 100 रुपए किलो के भाव तक मिल रहा है। बाजार में कई स्थानों पर इन दिनों सत्तू, चना, मोंठ इत्यादि बेचने वाले ढकेल लगा रहे हैं। लोग परिवार के सदस्यों के अनुसार सत्तू खरीदकर ले जाते दिखे। बता दें कि गर्मियों में सत्तू का सेवन फायदेमंद रहता है और यह शरीर को ठंडा रखता है। सत्तू मीठा, नमकीन समेत अन्य सामग्री मिला कर खाया जाता है। यह एनर्जी से भरपूर होता है। वहीं, डायबिटीज बीमारी से पीडि़त व्यक्तियों के लिए सत्तू सेवर लाभकारी रहता है। साथ ही सत्तू कब्ज संबंधी समस्या में भी राहत देता है। पोटेशियम, मैग्नीशियम और फाइबर से भरपूर होने के चलते यह मल को ढीला करने का काम भी करता है और डाइजेशन में भी सुधार करता है।
मचकुंड और चंबल नदी किनारे श्रद्धालुओं की रहेगी भीड़
गंगा दशहरा पर्व पर सुबह से ही तीर्थस्थल मचकुण्ड और शहर से सटी चंबल नदी किनारे स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की घाटों पर भीड़ रहेगी। विशेष कर मचकुण्ड सरोवर पर सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो जाता है। महंतों ने बताया कि पर्व पर सुबह सिद्धि योग रहेगा। साथ ही रवि योग और नक्षत्र भी रहेंगे। वहीं, तैतिल करण दोपहर 1.2 मिनट पर रहेगा।
शहर में गंगा मईया का मंदिर...
शहर में गंगा मईया का मंदिर है। यहां महाराना स्कूल के सामने यह मंदिर है। जानकारी के अनुसार 1901 राज परिवार के सदस्य पोहप सिंह राज बहादुर की पत्नी विचित्रा कुमारी साहिबा ने गंगा मईया मंदिर का निर्माण करवाया। इसके बाद सन् 1902 महाराजा भगवंत सिंह ने मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवाई और सेवा, राजभोग व मंदिर में पूजा अर्चना के लिए 15 रुपए माहवार के वेतन के साथ पुजारी नियुक्त किया, जिनकी पीढ़ी आज भी सेवा कर रही है। इस इस जगह को बाग भवा साहब का वाडा कहते हैं। धौलपुर में स्टेट समय गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा पर भव्य आयोजन होते थे।
Published on:
04 Jun 2025 07:22 pm

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