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राजस्थान में ये गिरोह सक्रिय, पुलिस की उड़ाई नींद

राजस्थान में ये गिरोह सक्रिय, पुलिस की उड़ाई नींद

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धौलपुर

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Rajesh

Jul 17, 2018

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धौलपुर। सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद माफिया बजरी खनन व परिवहन कर चांदी कूटने में लगे हैं। धौलपुर जिले और पड़ोसी मध्य प्रदेश के जिले मुरैना में बजरी कारोबार धड़ल्ले से पनप रहा है। यहां चंबल नदी के किनारे बजरी के ढेर लगे हुए हैं। राजस्थान में बजरी माफिया जहां रात के अंधेरे में बजरी निकाल रहा है, वहीं मध्यप्रदेश में दिन-रात बजरी का प्रबंध देखा जा सकता है । चंबल से सटे इलाकों में बजरी खनन होना आमबात बनी हुई है। यहां तक बजरी माफिया पुलस की पकड़ से दूर बने हुए हैं।

पुलिस अधिकारियों पर हो चुके जानलेवा हमले

बजरी माफिया के साथ पुलिस की मुठभेड और टकराव रोजमर्रा की बात बनकर रह गई है । बजरी माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह गाड़ी सीईओ रामचंद्र चौधरी, सीओ सतीश यादव सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला कर चुके हैं। कुछ समय पहले एक ट्रैक्टर जिसमें बजरी भरी थी, ट्रैक्टकर के पलटने में एक व्यक्ति की मौत हो गई। उस से गुस्साए लोगों ने यहां पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने पुलिस बल का मनोबल तोड़ कर रख दिया है।

पुलिस ने 228 लोगों को किया गिरफ्तार

बजरी चोरी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2017 में बजरी के 133 मुकदमे दर्ज हुए थे। इन मामलों में 171 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 98 ट्रैक्टर पकड़े गए थे। इस वर्ष जून तक 85 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और 57 लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। साथ ही पुलिस ने 4 ट्रक और 58 ट्रैक्टरों को बजरी के मामले में जब्त किया है। फिलहाल बजरी माफिया के हौसले बुलंद बने हुए है। अब पुलिस भी बजरी माफियाओं के आगे कमजोर साबित हो रही है। पुलिस बजरी परिवहन को रोकने के लिए रास्ते तक खुदवाए और पत्थर के भारी ब्लॉक भी डलवाए लेकिन, माफियाओं के रास्ते रोकने में पुलिस असमर्थ रही है।

घड़ियालों के जीवन पर संकट

जिले के राजाखेड़ा क्षेत्र में बजरी खुलेआम निकलकर यूपी की तरफ जा रही है, जहां आगरा जिले में इसकी मंडी लगती और मुंह मांगे दाम पर चंबल की अवैध बजरी बिक्री होती है।चंबल की एक बजरी ट्रॉली की कीमत 4 से ₹5000 है। पुलिस की सख्ती के दौरान इसके भाव ₹6000 तक भी चले जाते हैं। चंबल इलाके में बजरी की निकासी होने से क्षेत्र में निवास करने वाले घड़ियालों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है। आपको बता दें कि यह क्षेत्र घड़ियाल संरक्षित क्षेत्र है, बावजूद उसके यहां से बजरी खनन करना आम बात बनी हुई है। वन विभाग ने भी बजरी खनन को रोकने के काफी प्रयास किए लेकिन, विभाग भी बजरी खनन को रोकने में असमर्थ रहा।