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आयुर्वेद में मोटे अनाज का संयमित उपयोग स्वस्थ रहने में है लाभदायक

धौलपुर. आधुनिकता की इस दौड़ में न सिर्फ खान.पान की व्यवस्था बदली अपितु खेती एवं किसान भी बदल गई। आज से तीन दशक पूर्व हम अपने खाने में मोटा अनाज पसंद करते थे।

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 In Ayurveda, moderate use of coarse grains is beneficial in staying healthy

आयुर्वेद में मोटे अनाज का संयमित उपयोग स्वस्थ रहने में है लाभदायक

धौलपुर. आधुनिकता की इस दौड़ में न सिर्फ खान.पान की व्यवस्था बदली अपितु खेती एवं किसान भी बदल गई। आज से तीन दशक पूर्व हम अपने खाने में मोटा अनाज पसंद करते थे। मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी, शमा, कोदो, कंगनी, चैना, कुटकी आदि आते हंै। लेकिन हमने गेहूं, चावल को अपनी थाली में सजा लिया तथा औषधि गुणों, पोषण व स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण मोटे अनाज को खुद से दूर कर लिया। जिसे हमारी कई पीढिय़ां खाती आ रही थी परंतु वर्तमान में इन मोटे अनाज को स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण एवं उपयोगिता को देखते हुए मार्च 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से भारत की ओर से प्रस्ताव को सर्व सहमति से स्वीकृत किया। जिसके तहत वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष (इंटरनेशनल ईयर आफ मिलेट्स) घोषित किया गया।

हमारे यहां निम्न प्रकार के मोटे अनाज पाये जाते हैं

1 पुनर्वा (चीना)2 ज्वार

3 बाजरा

4 रागी

5 सांवा या सनवा बाजरा

6 कोदो बाजरा

7 छोटी कंगनी, हरी कंगनी, बाजरा

8 कंगनी बाजरा

9 कुटकी बाजरा

मोटे अनाजों के खाने के लाभ एवं औषधि गुण

- मोटे अनाजों में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्व होने के कारण इनके संयमित सेवन से शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है।

- मोटापा अनेक असंक्रामक रोगो जैसे मधुमेह, हृदय रोग, उच्चरक्ता दाब, हड्डियों से संबंधित रोग आदि का प्रमुख कारण है। मोटे अनाज में फाइबर एवं ट्रिप्टोफैन पाया जाता है जो कि मोटापे के नियंत्रण में सहायक है।

- इनके उपयोग से शरीर की पाचन संबंधित समस्याओं, आतों में सूजन एवं संक्रमण की समस्याएं कम हो जाती है। मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण एनीमिया एवं कुपोषण की समस्या को भी दूर करते हैं

- मोटे अनाजों में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने एवं फाइबर युक्त होने मधुमेह रोग में सहायक है।

- इनके सेवन से शरीर को ऊर्जा प्रदान होती है तथा विटामिन एवं पोषक तत्व के कारण भविष्य में होने वाली बीमारियों के बचाव में सहायक है।

- मोटे अनाज में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं जो फ्री रेडिकल के प्रभाव को कम करते हैं जो की उम्र बढऩे के लक्षणों को रोकते हैं।

रासायनिक संगठन

अलग अलग मोटे अनाजों में प्रमुख रूप से कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन, अमीनो एसिड, ट्रिपटोफैन, टैनिन, अनेक पोषक तत्व एवं मिनरल्स आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम तथा विटामिन बी, सी, बी-12 पाई जाती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट एवं कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले अनेक गुण पाए जाते हैं जिसके कारण मनुष्य को स्वस्थ रखने में लाभदायक है।

आयुर्वेद के अनुसार

आयुर्वेद के अनुसार मोटे अनाज का वर्णन आयुर्वेद के विभिन्न ग्रंथो चरक, सुश्रुत, भावप्रकाश आदि में आहार वर्ग नाम से उल्लेखित किया गया है। मोटे अनाज रुक्ष गुण के कारण कफ दोष को साम्यावस्था में करने में सहायक है। इनमें कोरदूष (कोदो) ए श्यामक (सावा) कफ पित्त का शमन करता है। वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी प्रभारी राजकीय आयुर्वेद औषधालय कासिमपुर के डॉ.विनोद गर्ग ने बताया कि एक स्वस्थ व्यक्ति को अपनी प्रकृति एवं रोग तथा ऋतु के अनुसार चिकित्सक के निर्देशानुसार इनका प्रयोग करना चाहिए एवं अत्यधिक मात्रा में सेवन से बचे। आयुर्वेद और विज्ञान के अनुसार मोटे अनाज का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक आहार माना गया है। मोटे अनाज यह पोषण से भरपूर होते हैं। इन्हें खाने से शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व हमारे शरीर में प्राकृतिक तरीके से पहुंचते हैं। मोटे अनाज मेदो रोग, हृदय रोगों रक्तचाप को कम कर सकते हैं और पेट से सम्बंधित रोगों, गैस्ट्रिक अल्सर, कब्ज, सूजन और पेट के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। मोटे अनाज फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है मोटे अनाज का उपयोग करने से पहले तीन से चार घंटे पहले भिगोकर रखना चाहिए उसके बाद इनकी रेसिपी बनाएं। इनको खीर, उपमा, डोसा, इडली, रोटी, खिचड़ी आदि विभिन्न रूप से उपयोग कर सकते हैं।

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