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भूमि से निकली झोर वाली मां, भर रही भक्तों की झोली

- नवरात्रि की सप्तमी, अष्टमी और नौवीं तिथि को लगता है मेला

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Loud mother emerges from the ground, filling the bags of devotees

भूमि से निकली झोर वाली मां, भर रही भक्तों की झोली

धौलपुर. नवरात्रि के दूसरे दिन शहर के बाड़ी रोड स्थित झोर वाली माता का इतिहास और मान्यता आपके सामने ला रहे हैं। अपने भक्त को स्वप्न में दर्शन देकर भूमि से निकली झोर वाली माता कई सालों से अपने भक्तों की झोली भर रही हैं।

झोर वाली माता

बाड़ी रोड स्थित झोर वाली माता या यूं कहें मन्नतों वाली माता कैला देवी के रूप में विराजमान हैं। जो अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं। कहा जाता है कि जो कोई भी भक्त श्रद्धा के साथ मां से अनुनविनय करता है तो मां उसकी झोली खुशियों से भर देती है। इसलिए इस माता को मन्नतों वाली माता भी कहा जाता है।

मां का मंदिर और उनकी स्थापना भी बहुत ही रोचक है। मंदिर के महंत कैलाश चंद बताते है कि एक रात मां ने उन्हें स्वप्न दिया और कहा कि मैं झोर गांव के पास भूमि में दबी हंू। मुझे यहां से निकालों और मेरी स्थापना करो। इसके बाद कैलाश चंद ने सुबह अपना स्वप्न परिवारीजन और लोगों को सुनाया। जिसके बाद सभी ने एक राय होकर वहां खुदाई की जहां मां ने बताया था। कुछ खुदाई करने के बाद मां के दिव्य दर्शन वहां उपस्थित सभी जनों ने किए। इस बात से अभीभूत कैलाश चंद ने वहीं मां के मंदिर का निर्माण 1990 में कराया। झोर गांव के पास माता के प्रकट होने के कारण मां का नाम भी झोर वाली माता पड़ गया। तब से माता झोर वाली आस-पास के क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर के प्रांगण में संतोषी माता का मंदिर भी है। तो हनुमान भी अपने भक्तों के लिए विराजमान हैं। उमापति महादेव अपने परिवार सहित स्थापित हैं।

नवरात्रि में लगता है मेला

मंदिर पर मेला का आयोजन तो हर वर्ष होता है लेकिन नवरात्रि की सप्तमी, अष्टमी और नौवीं तिथि के दिन विशेष मेला का आयोजन किया जाता है। जिसमें भक्त दूर-दूर से आकर माता के दर्शनों का लाभ प्राप्त करते हैं।

होती हैं मन्नतें पूरी

मान्यता है कि मंदिर में आने वाले भक्त मां का शृंगार और ध्वजा चढक़ार सच्चे मन से कुछ मांगता है तो मां उसकी मुराद जरूर पूर्ण करती है। नवरात्रि के दिनों में ध्वजा और नेजे माता पर खूब चढ़ाए जाते हैं।

यह हो रहे कार्यक्रम

नवरात्रि के पहले दिन से ही मंदिर में भक्तिमय कार्यक्रम हो रहे हैं। अल रोज मां के शृंगार के साथ महाआरती की जाती है। जिसके बाद शप्तसती और शतचण्डी का पाठ किया जाता है। शाम को प्रतिदिन माता की भेंट और भजनों का कार्यक्रम होता है। नौवीं तिथि को विशेष पूर्णा आहुति के साथ नवरात्रि का समापन होगा।