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कभी खेले थे यहां मेजर ध्यानचंद आज बदहाली का शिकार है वह खेल मैदान

धौलपुर. हॉकी के महान जादूगर मेजर ध्यानचंद व उनके पुत्र अशोक ध्यानचंद धौलपुर के एकमात्र खेल स्टेडियम इंदिरा गांधी स्टेडियम पर अपनी हॉकी की खनक भले ही दिखा चुके हों, लेकिन वहीं स्टेडियम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इस मैदान पर राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों ने पसीना बहाया है और अपनी हॉकी का देश में परचम फैलाया है।

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Major Dhyanchand once played here, today he is a victim of plight.

कभी खेले थे यहां मेजर ध्यानचंद आज बदहाली का शिकार है वह खेल मैदान

कभी खेले थे यहां मेजर ध्यानचंद आज बदहाली का शिकार है वह खेल मैदान

इंदिरा गांधी स्टेडियम हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद इस मैदान पर आ चुके हैं

खेल दिवस पर विशेष

धौलपुर. हॉकी के महान जादूगर मेजर ध्यानचंद व उनके पुत्र अशोक ध्यानचंद धौलपुर के एकमात्र खेल स्टेडियम इंदिरा गांधी स्टेडियम पर अपनी हॉकी की खनक भले ही दिखा चुके हों, लेकिन वहीं स्टेडियम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इस मैदान पर राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों ने पसीना बहाया है और अपनी हॉकी का देश में परचम फैलाया है। आज वही स्टेडियम खिलाडिय़ों के लिए नासूर बनता जा रहा है। कोरोना की बात करें तो उस समय खेल मैदान पर प्रशासन द्वारा सब्जी मंडी लगाकर मैदान की जो दुर्दशा कि वह किसी से छुपी नहीं है। कोरोना के दौरान जहां शरीर को फिट करने के लिए व्यायाम व खेलकूद अति महत्वपूर्ण माने गए थे। ऐसे में जिले के एकमात्र खेल स्टेडियम को प्रशासन ने सब्जी मंडी के रूप में परिवर्तित कर दिया था। खिलाडिय़ों की उम्मीदों को धराशाई कर दिया। उसके बाद सब्जी मंडी तो अपने स्थान पर चली गई, मगर पीछे छोड़ गई स्टेडियम की बदहाली, जो आज भी बरकरार है। एक्सप्रेस क्लब द्वारा इसी मैदान पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त खिलाडिय़ों की उपस्थिति में क्रिकेट का महाकुंभ किया गया था, तब यह स्टेडियम अपनी खूबसूरती से राजस्थान के सभी स्टेडियमों को बौना साबित कर रहा था। मगर नगर परिषद के साथ खेल विभाग और प्रशासन की उदासीनता के चलते आज भी यह स्टेडियम बदहाल है। प्रतिवर्ष आयोजनों के दौरान जनप्रतिनिधि द्वारा ढेरों घोषणाएं तो स्टेडियम को लेकर की जाती हैं, लेकिन धरातल पर ऊंट के मुंह में जीरे के समान भी पूरी नहीं होती। नगर परिषद सभापति से लेकर विधायक सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा भी स्टेडियम के सुंदरीकरण वैसे अत्याधुनिक स्टेडियम के रूप में विकसित करने को लेकर दर्जनों योजनाएं बनाई गई थी, लेकिन वे योजनाएं फाइल में ही दफन हो गई। आज भी प्रतिदिन इस मैदान पर सैकड़ों खिलाड़ी अपने भविष्य को निहारते नजर आते हैं। मगर संसाधनों के अभाव वे अपने खेल को निखार नहीं पा रहे। ऐसे ही खेल मैदान पर अभ्यास करके नीरज चोपड़ा जैसे खिलाडिय़ों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम गौरवान्वित किया था। हमारे यहां भी खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है संसाधनों की। इस खेल दिवस पर प्रशासन से यही उम्मीद है कि वे खिलाडिय़ों के लिए एक बेहतर खेल स्टेडियम के रूप में इंदिरा गांधी स्टेडियम को विकसित करेगा।