
मुस्लिम समाज द्वारा मनाई जाने वाली बकरीद पर कुर्बानी के लिए बकरों की जमकर खरीदारी हो रही है। बकरीद पर खस्सी बकरे को कुर्बानी के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। जिले में जगह-जगह लगने वाली विभिन्न पशु हाटों में इन दिनों बकरों की खरीदारी परवान पर है।
पशुहाट से अच्छी कद-काठी के बकरों को खरीदने के लिए समाज के लोगों में उत्साह दिख रहा है। हाट में सफेद, लाल, काले या दो-तीन रंगों वाले बकरे भी पसंद किए जा रहे हैं। देशी नस्ल के बकरे जहां 6 से 14 हजार तक बिक रहे हैं, वहीं खस्सी बकरे 32 हजार रुपए या इससे ऊपर तक बिक रहे हैं।
मनियां, सैंया और अन्य जगह की पशुहाटों से समाज के लोग खरीदारी कर रहे हैं। तलैया निवासी बिलाल खां, शानू, आरिफ, हामिद ने बताया कि सफेद रंग के लम्बे कद और बिना नुस्ख वाले बकरे 35 हजार तक मिल रहे हैं।
रसीद खां, आमिर, अकील, महमूद ने बताया कि ईद से एक माह पूर्व बकरे खरीदना शुरू कर देते हैं। मनियां निवासी इरशाद, इकबाल, बाबू खां ने बताया कि 12 से लेकर 21 हजार रुपए के बीच के बकरों की ज्यादा खरीदारी हो रही है।
अल्लाह को प्यारी कुर्बानी
शहर काजी मतीन खां गौरी ने बताया कि मंगलवार सुबह 9 बजे से ईदगाह पर नमाज अदा की जाएगी। मुस्लिम समाज की मान्यता के अनुसार अल्लाह ने हजरत इब्राहीम अलैहहस्सलाम को सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने को कहा तो उन्होंने अपने बेटे इस्माइल को कुर्बान किया। कुर्बानी के समय चमत्कार हुआ और बेटे की जगह दुम्बा अर्थात बकरे की कुर्बानी हुई।
अल्लाह ने इब्राहिम को खलीलुल्लाह यानी अपना दोस्त व इस्माइल को जबीउल्लाह यानी अल्लाह का जबीह का रुतबा दिया। इसी की याद में हर साल बकरे की कुर्बानी देकर ईद मनाई जाती है। मुस्लिम समाज के लोगों यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं।
Published on:
12 Sept 2016 03:47 pm
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