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संस्कृत विद्यालय का परीक्षा परिणाम खराब , बीस वर्षो से विद्यालय में नहीं है विषय अध्यापक

बाड़ी. उपखंड क्षेत्र के कंचनपुर पंचायत के अधीन राजकीय प्रवेशिका माध्यमिक संस्कृत विद्यालय के प्रवेशिका का 10वीं बोर्ड का परिणाम में विद्यालय का प्रदर्शन अत्यधिक खराब होने पर बुधवार को ग्रामीणों ने विद्यालय पहुंच विरोध प्रदर्शन किया।

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Sanskrit school exam result is poor, subject teacher is not in school for twenty years

संस्कृत विद्यालय का परीक्षा परिणाम खराब , बीस वर्षो से विद्यालय में नहीं है विषय अध्यापक

संस्कृत विद्यालय का परीक्षा परिणाम खराब , बीस वर्षो से विद्यालय में नहीं है विषय अध्यापक
बाड़ी. उपखंड क्षेत्र के कंचनपुर पंचायत के अधीन राजकीय प्रवेशिका माध्यमिक संस्कृत विद्यालय के प्रवेशिका का 10वीं बोर्ड का परिणाम में विद्यालय का प्रदर्शन अत्यधिक खराब होने पर बुधवार को ग्रामीणों ने विद्यालय पहुंच विरोध प्रदर्शन किया। विद्यालय सहित संस्कृत शिक्षा विभाग पर बच्चों के भविष्य को चौपट करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों के अनुसार उनके बच्चों को प्रवेश देने से पूर्व विद्यालय के अध्यापक और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने काफी सपने दिखाए थे। अच्छी पढ़ाई का वादा भी किया था, लेकिन पूरे वर्ष विद्यालय में नाम मात्र का अध्ययन कराया गया। ऐसे में एक बच्चे को छोड़कर सभी बच्चे परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गए। जिसको लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया और भविष्य में सुधार नहीं होने पर स्कूल को बंद करने तक की चेतावनी दी।
जानकारी के अनुसार बुद्धा पुरा गांव में संस्कृत शिक्षा विभाग का राजकीय प्रवेशिका विद्यालय है। जिसमें इस वर्ष 10वीं बोर्ड में 8 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। परीक्षा परिणाम में केवल एक छात्र पास हो पाया है। वह भी केवल 36 प्रतिशत अंकों के साथ। बाकी सभी छात्र फेल हुए है। ऐसे में बुधवार को ग्रामीणों का आक्रोश फूट गया उन्होंने विद्यालय पहुंच विरोध प्रदर्शन किया।

विद्यालय में नहीं है 20 वर्षों से विषय अध्यापक: कैसे हो बच्चों की पढ़ाई
विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद रिक्त है। ऐसे में इंचार्ज का पद संभाल रहे अध्यापक नीलमणि शर्मा ने बताया कि वास्तविकता में विद्यालय वर्ष 2000 में प्रवेशिका में क्रमोन्नत हुआ था, तब से लेकर 20 वर्ष गुजर गए, लेकिन विद्यालय में गणित, विज्ञान और हिंदी के विषय अध्यापक नहीं लग सके। केवल 3 अध्यापक ही पूरे विद्यालय को संचालित कर रहे हैं। दसवीं बोर्ड परीक्षा में 8 विद्यार्थी बैठे थे, जो सभी संस्कृत, अंग्रेजी और हिंदी विषयों में तो पास हुए हैं, लेकिन गणित, विज्ञान और अन्य विषयों में सभी अनुत्तीर्ण है।
परिणाम खराब, लेकिन विद्यालय क्रमोन्नत
स्कूल प्रशासन ने बताया कि इसी वर्ष विद्यालय को वरिष्ठ उपाध्याय में क्रमोन्नत किया गया है, लेकिन ना तो शिक्षक हैं और ना ही वरिष्ठ शिक्षक। ऐसे में क्रमोन्नत होने का कोई लाभ मिले, यह जरूरी नहीं है। दूसरी ओर प्रवेशिका का परिणाम ऐसा आया है, जो सिवाय शर्म के और कुछ नहीं है। 8 में से केवल एक छात्र ही उत्तीर्ण हो पाया है। जिसके चलते बुधवार को ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।

बच्चों के भविष्य को चौपट करने की जिम्मेदारी किसकी
20 वर्ष पहले क्रमोन्नत हुए विद्यालय को विज्ञान और गणित जैसे आवश्यक शिक्षक नहीं मिलने और लगातार प्रवेशिका में प्रवेश लेने के बाद हर वर्ष बच्चों के भविष्य को खराब करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। इसको लेकर जब संस्कृत शिक्षा विभाग के संभागीय शिक्षा अधिकारी हरिओम गौतम से जानकारी की गई तो उनका कहना था कि विभाग में ना तो डीपीसी हुई और ना ही नई भर्ती। ऐसे में टीचर नहीं मिल पाए हैं। जैसे ही डीपीसी होती है, या नए शिक्षक लगते हैं तो विद्यालय को शिक्षक भेजे जाएंगे। जिससे बच्चों की पढ़ाई चौपट ना हो। वहीं उन्होंने नवीन सत्र में लेने की बात पूछे जाने पर कहा की बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा, लेकिन पढ़ाई की जिम्मेदारी अधिकारी ने नहीं ली।

इनका कहना है

पिछले कुछ वर्षों से ना तो विभाग में डीपीसी हुई ना ही नई भर्ती। ऐसे में शिक्षक नहीं मिल सके हैं। जैसे ही नई भर्ती होती है और शिक्षक उपलब्ध होंगे तो विद्यालय को विषय अध्यापक उपलब्ध कराए जाएंगे। परिणाम खराब रहा है। इसकी भी जांच कराके उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
हरिओम गौतम, संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारी, भरतपुर।