dholpur, बाड़ी नगर पालिका कागजों में बीस करोड़ के घाटे में चल रही है जबकि ठेकेदारों की मौज हो रही है। आए दिन करोड़ों में टेंडर जारी हो रहे हैं। लेकिन सफाई कर्मचारियों की हालत ऐसी है कि उनके पास सफाई करने के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं।
dholpur, बाड़ी नगर पालिका कागजों में बीस करोड़ के घाटे में चल रही है जबकि ठेकेदारों की मौज हो रही है। आए दिन करोड़ों में टेंडर जारी हो रहे हैं। लेकिन सफाई कर्मचारियों की हालत ऐसी है कि उनके पास सफाई करने के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं। इन कर्मचारियों के पास मैला उठाने के लिए ना तो तसले का इंतजाम है और न ही नालियां साफ करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। झाड़ू की भी अनुपलब्धता है। शहर के लोग उनसे सामान लाने की बात कहते हैं तो वे बताते हैं कि आला अधिकारी नगर पालिका को घाटे में बता रहे हैं। जिसके चलते उनके पास संसाधनों का अभाव है।
कहने को वर्तमान में हम 21वीं सदी में रह रहे हैं लेकिन हमारे ही बीच रहने वाला एक समाज आज भी हाथ से मैला ढोने को मजबूर है। जबकि इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आदेश भी जारी कर रखे हैं। लेकिन बाड़ी नगर पालिका में संसाधनों के अभाव के चलते विभिन्न सफाई कर्मचारी प्रतिदिन अपने हाथ पर मैला ढो रहे हैं।
ठेके पर लगा रखे हैं कर्मचारी, ठेकेदार का नहीं ध्यान
सूत्रों के मुताबिक बाड़ी में सफाई का काम ठेके पर है जिसके चलते बड़े ठेकेदारों की ओर से विभिन्न इलाकों के ठेके ले रखे हैं। जबकि दो से तीन हजार रुपए में सफाई कर्मियों को लगा रखा है। जिन्हें पर्याप्त संसाधन भी नहीं उपलब्ध कराए गए हैं। ठेकेदार पैसे बचाने के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं करवाता। उधर, पालिका अधिकारी जान कर भी अनजान बने हुए हैं।
कचरा सफाई करते कपड़े हो जाते हैं गंदे
प्रतिदिन नालियों को साफ करने के लिए 50 फीसदी से अधिक महिलाएं आती हैं। ऐसे में उन्हें इस तरह की गंदगी को अपने हाथ से उठाकर अन्य स्थान पर ले जाना पड़ता है। लेकिन पर्याप्त संसाधन ना होने के चलते टूटे हुए पात्रों से कचरा बहता हुआ उनके सारे शरीर पर लग जाता है। जिसके चलते उक्त कर्मचारी बेहद परेशान होते हैं। बात करें नालियां खोलने की तो साइकिल के मडगार्ड का इस्तेमाल कर नालियों को खोलने का प्रयास किया जाता है।
देश में मैला ढोने पर १९९३ में लग चुका प्रतिबंध
गौरतलब रहे कि देश में 1993 में मैला ढोने वालों के रूप में लोगों के रोजगार पर प्रतिबंध लगा दिया। हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों का रोजगार और शुष्क शौचालयों का निर्माण (निषेध) अधिनियम, 1993) हालांकि, इससे जुड़ा कलंक और भेदभाव अभी भी बना हुआ है। यह सामाजिक भेदभाव मैनुअल स्कैवेंजिंग को छोड़ चुके श्रमिकों के लिए आजीविका के नए या वैकल्पिक माध्यम प्राप्त करना कठिन बना देता है। वर्तमान में सीवर की सफाई को पूरी तरह से मशीनीकृत करने (ऑन.साइट), सुरक्षा के तरीके अपनाने और सीवर में होने वाली मौतों के मामले में कर्मियों के परिवार वालों को मुआवजा प्रदान करने का प्रस्ताव करता है।
- कचरा पात्र की गाडिय़ा खराब पड़ी हैं। उन्हें ठीक कराने के लिए भेज रखा है। मरम्मत होते ही सफाई कर्मियों को सुपुर्द कर दी जाएगी।
- रामजीत सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका बाड़ी