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प्ले स्कूल के नाम पर खुली दुकानें, शिक्षा विभाग बेफ्रिक

- डीईओ कार्यालय में प्ले स्कूल के नाम पर एक भी पंजीकरण नहीं - फीस के नाम पर कर रहे मनमानी उगाही

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Shops open in the name of play school, education department careless

प्ले स्कूल के नाम पर खुली दुकानें, शिक्षा विभाग बेफ्रिक

धौलपुर. प्ले स्कूल के नाम पर जिले में संचालित बेनामी कारोबार का शिक्षा विभाग के पास कोई हिसाब नहीं है। इनके पास न तो भवन न ही ग्राउंड उसके बाद भी जिले में खूब प्ले स्कूल के नाम से विद्यालय खुल रहे है। जिला शिक्षा विभाग कार्यालय में प्ले स्कूल के नाम पर किसी भी विद्यालय का पंजीकरण नहीं है। फीस के नाम पर धन उगाही करने वाले ऐसे विद्यालयों की मनमानी पर अंकुश लगाने को भी कोई पहल नहीं की गई। जबकि शिक्षा विभाग ही इन स्कूलों का व्यौरा रखता है।

शहर में हर गली मोहल्ले में प्ले स्कूल चल रहे है। लेकिन इनके पास कोई मानक नहीं है। इन स्कूलों का शिक्षा विभाग के पास भी कोई सूची नहीं है। इनमें पढऩे वाले बच्चे खेल-खेल में शिक्षा ग्रहण करने आते है। महिला एवं बाल विकास के अंतर्गत आने वाले इन स्कूलों में अधिकारी विजिट भी नहीं करते है। आधुनिक युग में अधिकतर अभिभावक जॉब पर है इसके चलते प्ले स्कूलों की मांग बढ़ी है। तो शहर के गली-मोहल्लों में स्कूल खुल गए। अपने बच्चों को एडमिशन से पहले अभिभावक भी ध्यान नहीं देते है कि जिस प्ले स्कूल में वह अपने बच्चे का दाखिला कराया है, वह सरकार के तय मानक पूरा करता भी है या नहीं। एक दूसरे से जानकारी करके अभिभावक अपने बच्चे का एडमिशन प्ले स्कूल में करा रहे है। सरकार की ओर से तय मानकों में खुद का प्ले ग्राउंड होना चाहिए। फायर एनओसी अनिवार्य की गई है। गली-मोहल्ले में चलने वाले इन स्कूलों में खुद के पास प्ले ग्राउंड नहीं है। पार्क में बच्चों को मनोरंजन एक्टिविटी के लिए लेके जाते हे।

एक-एक कमरें में खोल दिए प्ले स्कूल:

जिले में शिक्षा विभाग के पास प्ले स्कूल के नाम से एक भी स्कूल का पंजीकरण नहीं है। इसके लिए ही शहर के गली-मोहल्ले में ये स्कूल खुले हुए है। जिनके पास कोई भी सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं है। माता-पिता भी एडिमिशन के समय इसकी जानकारी भी नहीं लेते कि सरकार के अधीन यह संचालित हो रहा है। या नहीं। महंगा प्रवेश शुल्क और मासिक फीस के साथ प्रतिमाह हजारों रुपये की वसूली करने वाले ऐसे प्ले स्कूल अभिभावकों का शोषण कर रहे हैं। सुरक्षा के प्रबंध हैं और न ही स्कूल संचालन से जुड़े मानक। शिक्षाधिकारियों की देखरेख में हो रहे संचालन का विभाग के पास कोई हिसाब-किताब नहीं है। शहर में 25 से ज्यादा स्कूल संचालित हो रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि उनके यहां प्ले स्कूल के नाम पर कोई भी पंजीकरण नहीं है।

ये होने चाहिए मानक:- चारों ओर से सुरक्षित चहार दीवारी के अंदर बच्चों के खेलने के लिए मैदान।

- सीसी कैमरों से निरागनी।

- बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान, पेयजल को आरओ का पानी और खेल की सामग्री।

- प्रशिक्षित शिक्षक, व्यायाम शिक्षक व निगरानी के लिए सुरक्षा गार्ड।

- आग से सुरक्षा के प्रबंध।

जिले में 19 राजकीय विद्यालय में एलकेजी व यूकेजी की कक्षांए संचालित हो रही है। वहीं निजी गली-मोहल्ले में खुले प्ले स्कूल संचालित होने का अभी विभाग के पास कोई पंजीकरण नहीं है। न हीे कोई कराने आया है। इसकी जानकारी करते है।

- महेश कुमार मंगल, जिला शिक्षा अधिकारी धौलपुर

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