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धूमधाम से निकला नगर का 168 वर्ष पुराना ऐतिहासिक बारह भाई मेला

देर रात हुआ राम और भरत का मिलन, दर्जनों झाकियों को देखने उमड़े शहरवासी dholpur, बाड़ी शहर में 168 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बारह भाई मेले का आयोजन किया गया। महाराणा प्रताप खेल मैदान से भाजपा नेत्री नीरजा अशोक शर्मा, पूर्व विधायक गिर्राज मलिंगा, भाजपा जिलाध्यक्ष राजवीर सिंह राजावत और एसडीएम भगवत शरण त्यागी ने हरी […]

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धूमधाम से निकला नगर का 168 वर्ष पुराना ऐतिहासिक बारह भाई मेला The 168-year-old historical Barah Bhai Mela of the city was celebrated with great pomp

देर रात हुआ राम और भरत का मिलन, दर्जनों झाकियों को देखने उमड़े शहरवासी

dholpur, बाड़ी शहर में 168 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बारह भाई मेले का आयोजन किया गया। महाराणा प्रताप खेल मैदान से भाजपा नेत्री नीरजा अशोक शर्मा, पूर्व विधायक गिर्राज मलिंगा, भाजपा जिलाध्यक्ष राजवीर सिंह राजावत और एसडीएम भगवत शरण त्यागी ने हरी झंडी दिखाकर झांकियों को रवाना किया। यह मेला जैसे-जैसे नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरा, आमजन का सैलाब मेले में उमड़ता चला गया। ऐतिहासिक बारह भाई मेला हर वर्ष चैत्र मास में आयोजित किया जाता है। ऐसे में मेला आयोजन को लेकर बारह भाई मेला कमेटी करीब एक महीने से तैयारियां की जा रही थीं। शहर के आम और खास हर नागरिक के आर्थिक सहयोग से यह मेला निकाला गया। जिसको दिव्य और भव्य बनाने के लिए जिले के साथ एमपी,यूपी से बैंड बुलाए गए।

मेले में भगवान राम करते हैं नगर भ्रमण :

त्रेता युग में 14 वर्ष के वनवास और लंका विजय के बाद जब भगवान राम पुष्पक विमान से वापस अयोध्या लौटे तो उनका अयोध्या में स्वागत सत्कार हुआ। इसी थीम पर यह तीन दिवसीय मेला आयोजित होता है। जिसमें पहले दिन मेला बैठक के रूप में भगवान राम,माता जानकी और भ्राता लक्ष्मण के साथ अन्य देवी-देवताओ का स्वागत सत्कार कर अयोध्या आगमन पर आरती की जाती है। दूसरे दिन भगवान राम नगर भ्रमण पर निकलते हैं जिसमें उनके तीनों भाई माता जानकी के साथ शिव-पार्वती,भक्त हनुमान,विघ्नहर्ता गणेश,के साथ विभिन्न देवी देवताओं के स्वरूपों को झांकियों के रूप में निकाला जाता है। जिसको देखने और दर्शन करने के लिए शहरवासी आतुर दिखाई दिए। इस दौरान प्रेम के प्रति ढोला-मारू,लैला-मजनू से लेकर देश पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले महाराणा प्रताप,वीर शिवाजी,तात्या टोपे,झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और कई वीर सपूत घोड़ों और ऊंटों पर सवार होकर मेले में निकले।

दो दर्जन से अधिक झांकियों के साथ निकला मेला

बारह भाई के मेले में भगवान परशुराम,मां सीता के साथ लव कुश,हनुमान की वानर सेना,,बांके बिहारी,धनलक्ष्मी,शिवजी के गण,सहित 28 झांकियां निकाली गईं। इस दौरान पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए मेला देर रात महाराणा प्रताप खेल मैदान पर जाकर संपन्न हुआ,जहां भगवान राम और भ्राता भरत का मिलन श्री युत राजा रामचंद्र की माहरो,अवधेश कुमार,बोल सियाराम चंद्र की जय" उद्घोष के साथ कराया गया।

मेला अतीत की धरोहर,संजोये रखना जरूरी

मेला शुभारम्भ के मोके पर अध्यक्ष राजेंद्र गर्ग उर्फ पप्पू ने कहा की यह मेला सन 1859 से अनवरत आयोजित होता आ रहा है। जो बाड़ी सहित पूरे जिले का सबसे पुराना मेला है। सं 1857 की क्रांति के बाद लोगो को एकजुट करने के लिए नगर के बारह युवाओं ने भाई बनकर इसको शुरू किया था। ऐसे में यह मेला हमारे अतीत के इतिहास को बताता है। ऐसे में इस धरोहर को हमें संजोए रखना जरूरी है। यह मेला रजिस्टर्ड मेला है, लेकिन इसको सरकार की कोई सहायता नहीं मिलती है। यह नगर वासियों के आर्थिक सहयोग से आयोजित होता है। मेला को सफल बनाने कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र गर्ग के साथ महामंत्री पबन चंसौरिया और अन्य पदाधिकारी दर्जनों युवा कार्यकर्ताओ के साथ जुटे हुए थे। मेला आयोजन के दौरान एसडीएम भगवत शरण त्यागी,तहसीलदार मुकेश कुमार मीणा,नायब तहसीलदार उत्तम चंद बंसल,सीओ महेंद्र कुमार,अग्रवाल समाज के ऋषि मित्तल,एडवोकेट संघ के प्रशांत हुंडावाल, मुन्नालाल मंगल,राधेश्याम गर्ग सहित सभी अतिथियों का मेला कमेटी द्वारा स्वागत और सम्मान किया गया। मेला आयोजन के दौरान पुलिस के कई थानों का जाब्ता,आरएसी के जवान जगह-जगह तैनात रहे।